
चंदौली जिले के धानापुर क्षेत्र में दलहन-तिलहन की खेती को बढ़ावा देने के प्रयास रंग लाते नजर आ रहे हैं। शिवानन्दम फॉर्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी खड़ान और कृषि विज्ञान केंद्र चंदौली के संयुक्त प्रयासों से मसूर की खेती में उल्लेखनीय सफलता हासिल हुई है। यहां एक एकड़ भूमि में 10 क्विंटल से अधिक मसूर का उत्पादन दर्ज किया गया, जिससे क्षेत्र के किसानों में नई उम्मीद जगी है।
इस पहल के तहत काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी के कृषि विज्ञान संस्थान और भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, कानपुर के सहयोग से एफपीओ से जुड़े दिया, पसहटा और बुद्धपुर गांवों के 24 किसानों को आईपीएल-225 किस्म का रोग प्रतिरोधी मसूर बीज निःशुल्क उपलब्ध कराया गया। किसानों ने वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में आधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए खेती की।

हाल ही में शस्य विज्ञान संस्थान, काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी के प्रोफेसर मनोज कुमार सिंह और प्रोफेसर अनिल कुमार सिंह अपने दो पीएचडी स्कॉलर्स के साथ खेतों का निरीक्षण करने पहुंचे। इस दौरान ग्राम बुद्धपुर में किसान राजनाथ उपाध्याय के खेत में मसूर की फसल की थ्रेसर से मड़ाई कराई गई, जिसमें एक एकड़ में 10 क्विंटल से अधिक उत्पादन दर्ज किया गया।
इस उपलब्धि को देखकर किसानों और वैज्ञानिकों में खासा उत्साह देखने को मिला। विशेषज्ञों ने किसानों को भविष्य में और अधिक उत्पादन बढ़ाने के लिए नई तकनीकों, उन्नत बीजों और खरपतवार नियंत्रण के बारे में विस्तृत जानकारी दी। साथ ही आगे भी निःशुल्क बीज उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।

कार्यक्रम के दौरान किसानों ने खेती से जुड़े विभिन्न सवाल पूछे, जिनका वैज्ञानिकों ने समाधान किया। एफपीओ के निदेशक रमेश सिंह और ओमप्रकाश सिंह ने किसानों से अपील की कि वे इस तरह के कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी करें, जिससे खेती की लागत कम हो और आमदनी में वृद्धि हो सके। उन्होंने जीरो टिलेज तकनीक और धान की सीधी बुआई पर भी जोर दिया।
अंत में निदेशक रमेश सिंह ने सभी उपस्थित किसानों और अतिथियों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर राजवंश सिंह, नगीना यादव, बासुदेव सिंह, सरवन कुमार बिंद, विवेक सिंह, कृष्णानंद सिंह, राघवेंद्र तिवारी सहित कई किसान मौजूद रहे।