
धानापुर l श्री श्री 1008त्रिड़ंडी स्वामी ज़ी महाराज के परम् शिष्य श्री जीयर स्वामी ज़ी महाराज द्वारा आयोजित सात दिवसीय श्री ज्ञान यज्ञ महोत्सव के अंतिम दिन बुधवार को माँ गंगा का पावन तट पर बसा रायपुर गांव सभा स्थित बाबा बीर डम्हारी मंदिर परिसर में आयोजित भागवत कथा समारोह में हजारों महिलाए पुरुषो साधू संतो का जन सैलाब उमड़ पड़ा पूरा पंडाल भीषण गर्मी के बावजूद खचाखचभरा था

श्रद्धांलूजनों को भागवत कथा का रसपान कराते हुए जीयर स्वामी ज़ी महाराज ने कहा कि संतों और आध्यात्मिक गुरुओं, जैसे श्री वसंत विजय जी महाराज या अन्य पूज्य महाराज जी द्वारा वर्णित ‘सूर्यवंश’ (सौर राजवंश) की कथा हिंदू पुराणों और वेदों के अनुसार सृष्टि के आरंभ से जुड़ी है। यह परम तेजस्वी और पवित्र वंश है, जिसमें मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने अवतार लिया था।सूर्यवंश की उत्पत्ति, वंशावली और प्रमुख संतों द्वारा वर्णित इसकी कथा का सार विस्तार से सुनाते हुए कहा कि . सूर्यवंश की उत्पत्तिपौराणिक ग्रंथों जैसे हरिवंश पुराण और श्रीमद्भागवतम् के अनुसार, इस वंश के मूल पुरुष साक्षात् भगवान सूर्यनारायण (विवस्वान) हैं।सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा के पुत्र मरीचि, मरीचि के पुत्र कश्यप और कश्यप के पुत्र विवस्वान (सूर्य) थे।सूर्यदेव के पुत्र वैवस्वत मनु हुए, जिन्हें मानव जाति का आदि-पिता माना जाता है।वैवस्वत मनु के दस पुत्र थे, जिनमें ज्येष्ठ इक्ष्वाकु थे। महाराज इक्ष्वाकु ने ही इस वंश को आगे बढ़ाया, इसलिए इसे ‘इक्ष्वाकु वंश’ भी कहा जाता है।. प्रमुख सूर्यवंशी राजासंतों की कथा के अनुसार, इस वंश में ऐसे महान चक्रवर्ती राजा और वीर हुए जिन्होंने धर्म, न्याय और सत्य की रक्षा की:राजा मानधाता: अत्यंत पराक्रमी राजा, जिनके राज्य में अकाल का नामोनिशान नहीं था।राजा हरिश्चंद्र: सत्य और दान के लिए अपना पूरा राज्य और परिवार तक न्यौछावर कर देने वाले राजा।राजा सगर जिनके यज्ञ के घोड़े की रक्षा के लिए उनके साठ हजार पुत्रों ने अपने प्राण त्याग दिए थे।राजा भगीरथअपने पूर्वजों के उद्धार के लिए कठोर तपस्या करके मां गंगा को धरती पर लाने वाले महान राजा हुए l रघुकुल और भगवान श्रीराम का अवतरणइसी वंश में आगे चलकर चक्रवर्ती महाराजा रघु हुए, जिनके महान पराक्रम के कारण इस वंश को ‘रघुकुल’ के नाम से भी जाना जाने लगा।राजा रघु के कुल में राजा दशरथ हुए।इन्हीं के ज्येष्ठ पुत्र मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम थे। भगवान राम के रूप में इस वंश का सबसे गौरवशाली और पावन अध्याय लिखा गया।. कथा का मुख्य संदेशमहाराज जी कथा के माध्यम से यह संदेश देते हैं कि सूर्यवंश हमें अनुशासन, त्याग, सूर्य के समान तेज, और अपने वचन (रघुवंश रीत सदा चली आई, प्राण जाए पर वचन न जाई) के पालन का उपदेश देता है। यह वंश बुराई पर अच्छाई और धर्म की विजय का प्रतीक है।
कथा के समापन के पश्चात आरती व प्रसाद का वितरण हुआ कार्यक्रम संयोजक कमेटी ने बताया कि बृहस्पतिवार को सुबह आरती के पश्चात् स्वामी ज़ी का प्रस्थान होगा l