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भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है पंचांग : डॉ. परशुराम सिंह

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चकिया  भारतीय संस्कृति रक्षा धर्म तथा राष्ट्र सृजन से जुड़े राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. परशुराम सिंह ने हिंदू नव वर्ष के अवसर पर भारतीय पंचांग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पंचांग केवल समय गणना का साधन नहीं, बल्कि भारतीय जीवनशैली, परंपराओं और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का आधार है। उन्होंने बताया कि भारतीय पंचांग हमारे पूर्वजों के ज्ञान, विज्ञान और दर्शन की झलक प्रस्तुत करता है।
डॉ. सिंह ने बताया कि पंचांग के पांच प्रमुख अंग होते हैं। तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। तिथि का निर्धारण चंद्रमा की गति के आधार पर होता है, जबकि वार सप्ताह के सात दिनों को दर्शाता है। नक्षत्र चंद्रमा की स्थिति से संबंधित होते हैं, जिनका ज्योतिषीय महत्व विशेष रूप से जन्म कुंडली और विवाह जैसे निर्णयों में देखा जाता है। वहीं योग और करण सूर्य-चंद्रमा की स्थिति के अनुसार बनते हैं, जिनका शुभ-अशुभ कार्यों में विशेष प्रभाव माना जाता है।
उन्होंने कहा कि भारतीय समाज में धार्मिक अनुष्ठान, पर्व-त्योहार और व्रत आदि पंचांग के अनुसार ही निर्धारित किए जाते हैं। दीपावली, होली, मकर संक्रांति और दशहरा जैसे प्रमुख त्योहार भी इसी आधार पर मनाए जाते हैं। पंचांग का उपयोग कृषि कार्यों, यात्रा योजनाओं और निर्माण कार्यों में भी मार्गदर्शक के रूप में किया जाता रहा है।
डॉ. सिंह ने आधुनिक युग में भी पंचांग की प्रासंगिकता बताते हुए कहा कि यह हमारी सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने के साथ-साथ हमें प्रकृति और समय के महत्व से जोड़ता है।

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