[smartslider3 slider="2"]

चंदौली में इंट्री फीस का खेल? अवैध वसूली के खेल में मोहरा बना बलि का बकरा,’ रियल हीरो ‘ को बचाने की जुगत जारी

Connect With Social Media

रिपोर्ट: ओ पी श्रीवास्तव, चंदौली…

चंदौली: चंदौली जिले में परिवहन विभाग एक बार फिर विवादों में है। विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों पर ट्रक चालकों से कथित तौर पर मंथली ‘इंट्री फीस’ के नाम पर अवैध वसूली करने के गंभीर आरोप लगे हैं। मामले में शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक सिपाही को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है,जबकि पूरे प्रकरण को लेकर कई बड़े सवाल उठ रहे हैं।

विदित हो कि गाजीपुर के ट्रांसपोर्टर सुनील यादव ने आरोप लगाया है कि ट्रकों को रास्ते में रोककर चालान और सीज करने की धमकी दी जाती थी, साथ ही उनकी ट्रक को इंट्री फीस ना देने के एवज में जबरिया औद्योगिक नगर चौकी पर खड़ा कर दिया गया।इस परेशानी से बचने के लिए प्रति ट्रक करीब ₹5000 महीने की ‘इंट्री फीस’ तय बताई जा रही थी।


मामला उस समय चर्चा में आया जब 19–20 फरवरी की रात चंदौली – मिर्जापुर पर एक ट्रक को रोका गया। आरोप है कि बॉर्डर पर कार्रवाई करने के बजाय ट्रक को चंदौली लाकर चालान किया गया और पुलिस चौकी में खड़ा करा दिया गया। इससे यह सवाल उठ रहा है कि अगर ट्रक में गड़बड़ी थी तो मौके पर ही कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

शिकायतकर्ता का दावा है कि इससे पहले भी करीब ₹90 हजार रुपये ‘इंट्री फीस’ के नाम पर ऑनलाइन वसूले जा चुके हैं। साथ ही करीब 06 लाख नगदी भी दिए जा चुके हैं। बतौर सुनील यादव की माने तो जब परिवहन विभाग की टीम द्वारा लगातार डिमांड बढ़ती गई तो आजिज होकर डीआईजी वाराणसी परिक्षेत्र से न्याय की गुहार लगाई गई। डीआईजी ने एसपी चंदौली को मामले से अवगत कराते हुए सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया तो शिकायतकर्ता चंदौली एसपी कार्यालय पहुंच मामले के साक्ष्य दिखाए, तब जाकर मामला दर्ज किया गया। एएसपी की माने तो साक्ष्य सही मिलने पर दरोगा दुर्गा प्रसाद श्रीवास्तव को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। वहीं पूरे प्रकरण की जांच सीओ सदर देवेंद्र कुमार को सौंप दी गई।

हालांकि शिकायतकर्ता का कहना है कि बड़े अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, क्योंकि बिना उच्च स्तर की जानकारी के इस तरह की व्यवस्था चल पाना मुश्किल है। आपको बता दें कि आरोप के तदर्थ ARTO डा सर्वेश गौतम इस मामले में ट्रांसपोर्टर से अकेले में मिलने और ट्रांसपोर्टर द्वारा व्यवस्था दो दिन बाद होने का ऑडियो क्लिप उजागर हुआ है। साथ ही शिकायतकर्ता ट्रांसपोर्टर ने इस बात के भी साक्ष्य दिए हैं कि सिपाही दुर्गा प्रसाद श्रीवास्तव ‘ साहब ‘ के कहने पर ही पांच हजार मंथली की मांग की है। जिसका ऑडियो भी सुर्खियां बटोर रहा है।

शिकायतकर्ता के अनुसार सिपाही दुर्गा प्रसाद श्रीवास्तव के कहने पर ही पेट्रोल पंप के मैजनेजर के खाते मे कई बार रकम डाली गई थी। शिकायतकर्ता सुनील यादव ने बताया कि सारे साक्ष्य पुलिस महकमें के उच्चाधिकारियों के पास मौजूद हैं, उसके बावजूद सिपाही को मोहरा बनाकर किंग को बचाने की जुगत जारी है।फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और अधिकारियों द्वारा लगातार आश्वासन दिया जा रहा है कि यदि आरोप सही पाए गए तो संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।अब सबकी निगाहें जांच पर टिकी हैं—क्या यह कुछ कर्मचारियों की निजी वसूली थी, या फिर सड़क पर कानून के नाम पर चलता है कोई ‘अनौपचारिक टोल सिस्टम’?

Leave a Comment

error: Content is protected !!