
इलिया(चन्दौली) । धन्नीपुर गांव में राधा कृष्ण सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन सोमवार को आध्यात्मिक वातावरण भक्ति रस से सराबोर रहा। वृंदावन धाम से पधारे कथा वाचक व्रजरज दास जी महाराज ने अपने ओजस्वी और भावपूर्ण प्रवचन से श्रद्धालुओं के हृदय को भक्ति भाव से भर दिया।
कथा व्यास ने कहा कि मनुष्य जीवन अत्यंत दुर्लभ है और इसका वास्तविक उद्देश्य केवल भौतिक सुख-सुविधाओं की प्राप्ति नहीं, बल्कि भगवान की भक्ति, सत्संग और मानव सेवा के माध्यम से आत्मकल्याण करना है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन को नई दिशा देने वाला अमृतमय ज्ञान है, जिसके श्रवण से मनुष्य के भीतर सकारात्मक परिवर्तन आता है और उसका मन सत्य, प्रेम तथा सेवा के मार्ग की ओर अग्रसर होता है।
महाराज जी ने कहा कि जब मनुष्य भगवान के नाम का स्मरण करता है और सत्संग की पावन संगति में बैठता है, तो उसके भीतर के विकार धीरे-धीरे समाप्त होने लगते हैं और जीवन में शांति, संतोष तथा आनंद का अनुभव होता है। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का मार्मिक वर्णन करते हुए कहा कि भगवान बाहरी आडंबर नहीं, बल्कि भक्त की सच्ची भावना और निष्कपट भक्ति को स्वीकार करते हैं।
उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं को संदेश देते हुए कहा कि जीवन में अहंकार का त्याग कर विनम्रता, सेवा और करुणा को अपनाना चाहिए। जब मनुष्य दूसरों की सहायता करता है और समाज के कल्याण के लिए कार्य करता है, तभी उसकी भक्ति सार्थक होती है।
कथा व्यास ने पारिवारिक जीवन पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि घर-परिवार में प्रेम, संस्कार और आपसी सम्मान का वातावरण बना रहना चाहिए। यदि परिवार के सदस्य एक-दूसरे के प्रति आदर और सद्भाव रखते हैं तो वही परिवार समाज के लिए आदर्श बनता है और समाज भी सुदृढ़ होता है।
कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे रहे। भजन-कीर्तन और भगवान की आरती के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ, जिसमें उपस्थित भक्तों ने श्रद्धा भाव से भाग लेकर सुख-समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना की।
इस अवसर पर रामदास त्यागी जी महाराज, कमलेश यादव, विजय विश्वकर्मा, रामस्वरथ यादव, संजू यादव, निर्मला देवी, प्रमिला देवी, बल्लू यादव, सिपाही यादव, हवलदार यादव सहित क्षेत्र के सैकड़ों श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए उपस्थित रहे।