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बुढ़वा मंगल पर सैदूपुर में सजा लोक संगीत व कविता का दरबार, कलाकारों ने बांधा समां

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इलिया(चन्दौली) । बुढ़वा मंगल के पावन अवसर पर सैदूपुर स्थित हनुमान मंदिर प्रांगण मंगलवार की शाम लोक संस्कृति और साहित्यिक रसधारा से सराबोर हो उठा। उस्ताद हरिवंश सिंह की स्मृति में आयोजित लोक संगीत एवं कवि सम्मेलन में लोकगायकों और कवियों ने अपनी सुमधुर प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ उस्ताद हरिवंश सिंह के चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर किया गया।
लोक संगीत की श्रृंखला में संतोष द्विवेदी ने “शंभू संग खेलत होरी, श्री गिरिराज किशोरी” की भक्तिमय प्रस्तुति से वातावरण को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया। रामजन्म भारती ने “हमारी तुम्हारी ना जोरी…” गीत सुनाकर खूब तालियां बटोरीं। त्रिवेणी द्विवेदी की “मिथिला में राम खेलत होली” प्रस्तुति ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया, वहीं राजकुमार विश्वकर्मा ने “हमार नऊंवा सुदामा…” गीत के माध्यम से सच्ची मित्रता की भावनाओं को जीवंत किया। इसके अतिरिक्त रामनगीना व्यास, डॉ. दिवाकर सिंह, रामविलास, रमाशंकर राय, डॉ. बुद्ध प्रताप, धर्मदेव प्रजापति, अमरनाथ पाल, मेवालाल और गंगा दयाल सहित कई लोकगायकों ने अपने गीतों से समां बांध दिया।
कवि सम्मेलन में भी साहित्यिक रंग खूब जमे। पाल बंधु ने “असो क होली शराब में डूब गइल” कविता के माध्यम से सामाजिक विसंगतियों पर तीखा व्यंग्य किया। राजेंद्र प्रसाद भ्रमर ने अपनी रचना से वर्तमान सामाजिक परिवेश पर सार्थक प्रहार किया, जबकि संतोष धूर्त की हास्य रचना पर श्रोताओं के बीच ठहाकों की गूंज सुनाई दी। हरिवंश सिंह बवाल ने “जो कहता है किसी से दुश्मनी नहीं…” पंक्तियों से सभागार को तालियों से गुंजायमान कर दिया। इसके अलावा कवि राजेश विश्वकर्मा ‘राजू’, शिवदास विश्वकर्मा, राजेंद्र प्रसाद गुप्ता, विजय सिंह मलिक, मुंसे मोहम्मद जानी, शिवदास अनपढ़, मनीराम सैलाब, अलियार प्रधान और बसीर अहमद ने भी अपनी रचनाओं से श्रोताओं को बांधे रखा।
इस अवसर पर सभी लोकगायकों और कवियों को अंगवस्त्र व स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि समाजसेवी संजय सिंह ने कहा कि लोकगीत और कविता हमारी समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा की अमूल्य धरोहर हैं। ऐसे आयोजन समाज में प्रेम, भाईचारा और सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करते हैं।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में नवल किशोर सिंह उपस्थित रहे। संचालन सुभाष विश्वकर्मा तथा कवि मंच का संचालन राजेश विश्वकर्मा ने किया। अंत में संयोजक गौरीशंकर सिंह ने सभी अतिथियों, कलाकारों और उपस्थित जनसमूह के प्रति आभार व्यक्त किया।

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