
चन्दौली।थाना सैयदराजा क्षेत्र में गो-तस्करी के एक बड़े प्रयास को पुलिस ने भले ही नाकाम कर दिया हो, लेकिन पूरी कार्रवाई के दौरान सामने आए हालात ने व्यवस्था की गोपनीयता और सूचना तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस चेकिंग से पहले ही तस्करों को सतर्क किया जाना किसी गहरी साजिश की ओर इशारा कर रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार पुलिस टीम जेठमलपुर तिराहा, एनएच-2 हाईवे पर बैरियर लगाकर नियमित वाहन चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान चन्दौली की ओर से आ रहे दो पिकअप वाहन पुलिस की नजर में आए। चौंकाने वाली बात यह रही कि पुलिस के रुकने का इशारा करने से पहले ही एक सफेद ब्रेजा वाहन पिकअप के समानांतर आकर उसमें सवार लोगों को आगे पुलिस चेकिंग की सूचना देता दिखाई दिया। इसके बाद पिकअप चालकों ने तेजी से वाहन निकालने की कोशिश की।
हालांकि पुलिस की सतर्कता से तीनों वाहनों को रोक लिया गया और मौके से 03 गो-तस्करों को हिरासत में ले लिया गया। तलाशी के दौरान 03 राशि गोवंश, 02 पिकअप वाहन, 01 ब्रेजा कार, 02 मोबाइल फोन और ₹400 नकद बरामद किए गए।
इस मामले में थाना सैयदराजा पर मु.अ.सं. 33/26 के तहत धारा 3/5ए/5बी/8 गोवध निवारण अधिनियम एवं 109/3(5) बीएनएस में मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई की जा रही है।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी बना हुआ है—पुलिस चेकिंग की जानकारी तस्करों तक पहले कैसे पहुँची? क्या यह महज एक संयोग था या फिर किसी स्तर पर सूचना लीक होने की गंभीर चूक?
सूत्रों का कहना है कि गो-तस्करी जैसे संगठित अपराधों में केवल गिरफ्तारी ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सूचना तंत्र की निष्पक्षता और गोपनीयता की गहन जांच भी जरूरी है। जब तक इस पहलू पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसे अवैध धंधों पर पूरी तरह अंकुश लगाना मुश्किल रहेगा।