

चहनियां (चंदौली)। बलुआ थाना क्षेत्र के दर्जनों गांवों में इन दिनों अवैध रूप से बलुई मिट्टी का खनन धड़ल्ले से जारी है। लगातार हो रहे खनन से जहां पर्यावरणीय असंतुलन और संभावित दैविक आपदा का खतरा बढ़ गया है, वहीं ग्रामीणों की सुरक्षा भी गंभीर संकट में पड़ गई है। क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है।
क्षेत्र के मारूफपुर, फुलवरिया, चकगुरेरा, उतरी, छपरा तुर्कहा, अटौली, पपरौल और मनीपट्टी सहित कई गांवों में पिछले कई महीनों से बड़े पैमाने पर मिट्टी का खनन किया जा रहा है। खनन कार्य में लगे ट्रैक्टर और डंपर दिन-रात तेज रफ्तार से संचालित हो रहे हैं, जिससे ग्रामीणों और राहगीरों के लिए खतरा बढ़ गया है। अधिक से अधिक चक्कर लगाने की होड़ में वाहन चालक नियमों की अनदेखी कर रहे हैं, जिसके चलते दुर्घटनाओं की आशंका लगातार बनी हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह पूरा क्षेत्र गंगा के तराई क्षेत्र में स्थित है और बरसात तथा बाढ़ के समय यहां पहले से ही खतरा बना रहता है। ऐसे में अंधाधुंध खनन से भूमि कटान, जलभराव और बाढ़ जैसी समस्याएं और गंभीर हो सकती हैं। लोगों का मानना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो भविष्य में किसी बड़ी आपदा से इनकार नहीं किया जा सकता।
स्थानीय लोगों ने बताया कि अवैध खनन के कारण कई ग्रामीण मार्ग भी क्षतिग्रस्त और बाधित हो चुके हैं। कुछ समय पूर्व इसी प्रकार की खुदाई के चलते रास्ते से गुजर रहे दो बाइक सवारों की जान भी चली गई थी, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्रीय अधिकारियों से लेकर उच्चाधिकारियों तक कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल आश्वासन ही मिला। इससे लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।
क्षेत्रवासियों ने जिलाधिकारी चंदौली और मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकृष्ट कराते हुए अवैध खनन पर तत्काल रोक लगाने, दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने तथा प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि एक ओर प्रशासन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की समीक्षा बैठकों में सुरक्षा और बचाव के दावे कर रहा है, वहीं दूसरी ओर खुलेआम जारी अवैध खनन उन दावों पर सवाल खड़े कर रहा है।