
पीडीडीयू नगर(चन्दौली)- फुटपाथ पर जिंदगी तो सभी ने देखा सुना होगा लेकिन सड़क पर जिंदगी की जब बात करे तो इंसानी जीवन से इस तरह का बर्ताव एक बार मन मस्तिष्क को झकझोर देती है।ऐसी ही तस्वीर पीडीडीयू नगर के सड़क पर प्रतिदिन देखने को मिलती है। यहां दर्जनों बेघर लोग पटरी नही बल्कि सड़क पर ही बिस्तर लगा कर सोते मिल जाएंगे।

ये नजारा कोई फिल्मी नही बल्कि डीडीयू जँ गेट संख्या 2 के सामने का है यहां आपको प्रतिदिन दर्जनों की संख्या में बेघर लोग सड़क पर ही बिस्तर लगा कर सोते हुए मिलेंगे।जिन्हें न दुर्घटना का डर है और न ही किसी बीमारी का। सरकार की तमाम योजनाएं फलीभूत होने के बजाय दम तोड़ देती है जब ऐसी तस्वीरें सामने आती है।न कोई सामाजिक संस्था आगे आती है और न ही सरकारी महकमा।

दरअसल ये समाज से भटके वही लोग हैं जो नशे व भिक्षाटन के आदी हो चुके है।रेल परिसर इनका विगत कई वर्षों से आशियाना रहा है लेकिन हाल के दिनों में रेल प्रशासन द्वारा रात के समय परिसर से बाहर कर दिया जाता है ऐसे में इनके पास सड़क पर बिस्तर लगा कर सोने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नही बचता।जिले के जिम्मेदार अधिकारी भी कोई विकल्प नही दे पा रहे। रैन बसेरा की दूरी स्टेशन से इतनी ज्यादा है कि वहां तक पहुचने का किराया नगर के डोरमेट्री के बराबर हो जाता है।