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बबुरी में श्रीमद्भागवत कथा में बही भक्ति की सरिता, कृष्ण जन्मोत्सव पर झूमे श्रद्धालु

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बबुरी, चंदौली। बबुरी स्थित मां बागेश्वरी देवी मंदिर प्रांगण में मानस मंजरी समिति द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के 26वें सोपान के चतुर्थ दिवस पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा व्यास पंडित कमोद मिश्र शास्त्री ने भगवान की विभिन्न दिव्य लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन कर श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति और मर्यादा का संदेश दिया।
कथा का शुभारंभ गजेंद्र मोक्ष प्रसंग से हुआ। पंडित शास्त्री ने बताया कि जब सरोवर में ग्राह ने गजेंद्र का पैर पकड़ लिया और वह अपने प्रयासों से मुक्त नहीं हो सका, तब उसने पूर्ण समर्पण भाव से भगवान श्रीहरि का स्मरण किया। भक्त की पुकार सुनकर भगवान विष्णु गरुड़ पर सवार होकर पहुंचे और सुदर्शन चक्र से ग्राह का वध कर गजेंद्र को मुक्ति प्रदान की।
इसके बाद राम जन्मोत्सव का प्रसंग सुनाते हुए कथा व्यास ने बताया कि अयोध्या नरेश दशरथ द्वारा कराए गए पुत्रकामेष्टि यज्ञ के फलस्वरूप चैत्र शुक्ल नवमी को भगवान श्रीराम का अवतार हुआ। राम जन्म का वर्णन होते ही पूरा पंडाल ‘जय श्रीराम’ के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भगवान राम के आदर्शों और मर्यादा का स्मरण किया।


कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण जन्म का प्रसंग भी बड़े ही भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया गया। पंडित कमोद मिश्र शास्त्री ने बताया कि भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की मध्यरात्रि में कंस के कारागार में भगवान श्रीकृष्ण का अवतरण हुआ। उनके जन्म लेते ही वसुदेव-देवकी की बेड़ियां टूट गईं, कारागार के ताले स्वयं खुल गए और द्वारपाल गहरी नींद में सो गए। इसके बाद वसुदेव भगवान श्रीकृष्ण को सूप में रखकर यमुना पार कर गोकुल पहुंचाए।
कृष्ण जन्मोत्सव के प्रसंग पर शंख, घंटा और मृदंग की ध्वनि से पूरा कथा पंडाल गूंज उठा। वहीं पंडित कमोद मिश्र शास्त्री द्वारा प्रस्तुत भजन ‘श्री कृष्ण चंद्र भगवान मुरलिया वाले, खुल गए जेल के ताले’ पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे। महिलाएं, पुरुष और बच्चे भक्ति रस में डूबकर नृत्य करने लगे तथा ‘नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर पुण्य लाभ प्राप्त किया।

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