[smartslider3 slider="2"]

बांग्लादेशी घुसपैठिये या स्लीपर सेल! कितने सुरक्षित है देशवासी!

Connect With Social Media

चन्दौली (महेन्द्र प्रजापति)-) खबर मुग़लसराय कोतवाली क्षेत्र से है जहाँ विभिन्न क्षेत्रों में हजारों की संख्या में बांग्लादेशी घुसपैठियों ने जगह जगह बसेरा बना रखा है। मुग़लसराय कोतवाली क्षेत्र की बात करें तो अब तक दर्जन भर घुसपैठिये जेल भेजे जा चुके हैं जिनमे कई तो सजा काट कर अपने वतन को रवाना भी हो चुके लेकिन घुसपैठियों के आने व उनके रहनुमाओ द्वारा फर्जी दस्तावेज बनवाने का सिलसिला बन्द नही हो पाया।हैरानी तक होती है जब उनके फर्जी दस्तावेजों को बनवाने में मददगारों की लिस्ट में स्थानीय लोगो के अलावा सरकारी कर्मचारी भी संलिप्त पाया जाता है।

अवैध तरीके से रह रहे बँग्लादेशी कही न कही देश की आंतरिक सुरक्षा को खतरा पैदा कर रहे हैं। ये राष्ट्रविरोधी ताकतों के लिए स्लीपर सेल भी हो सकते है जो  भारत मे अवैध तरीको से घुस कर सभी सरकारी सुविधाओं का लाभ भी ले रहे है और समय समय पर अपनी एकजुटता दिखा कर डेमोग्राफी परिवर्तन का हिस्सा भी बन रहे है।जिसपर सरकारी मशीनरी ने सख्ती से काम नही लिया तो  आने वाले वर्षों में अस्थिरता का माहौल होने से इनकार नही किया जा सकता।इनके इलाके जलीलपुर,चौरहट, मढिया,दुल्हीपुर,हनुमानपुरा अहिरान व चमरौटी,मुस्लिम महाल प्रमुख है।

●आइये बताते है विगत वर्षों में कितने बांग्लादेशी पकड़े गए। अक्टूबर 2013 में मढिया व जलीलपुर से 3 बांग्लादेशी गिरफ्तार किए गए जिनका सहयोग करने में पुलिस अधीक्षक कार्यालय में तैनात एक कर्मचारी की भी संलिप्तता पाई गई थी जो ड्यूटी में होते हुए फरार  हो गया था। वही मई 2017 में मढिया इलाके से 4 बांग्लादेशी पकड़े गए जिनका फर्जी दस्तावेज तैयार कराने में तीन स्थानीय लोगो की भी संलिप्तता पाई गई थी।इसके अलावा नवंबर 2018 में दुलहीपुर इलाके से 5 बांग्लादेशी पकड़े जा चुके हैं। इन सभी मामलों में एक समानता रही कि जब ये पासपोर्ट के लिए आवेदन किये तब दबोचे गए। लेकिन बिना पासपोर्ट की चाहत वालो पर सरकारी मशीनरी मौन है।

●हैरानी तब हुई जब 2013 में  मुगलसराय कोतवाली पुलिस ने पड़ाव क्षेत्र के मडिया व् जलीलपुर में ज्यादा समय से अवैध रूप से रह रहे तीन बंगलादेशी नागरिको को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है और उक्त मामले में पुलिस अधीक्षक कार्यालय में तैनात तत्कालीन उर्दू अनुवादक अयूब की संलिप्तता की बात प्रकाश में आयी थी।जिसके बाद पुलिस ने उक्त बाबु के खिलाफ भी मामला दर्ज कर आगे की कार्यवाही की बात कही लेकिन आगे कार्रवाई हुई या बरी कर दिए गए ये रिकार्ड या तो पुलिस के पास है या खुफिया एजेंसियों के पास। उक्त मामले में पड़ाव क्षेत्र के मडिया निवासी मो. असलम पुत्र अफजल व् जहरुल पुत्र शाहीब,जलीलपुर निवासी रतन पुत्र जगदीश ने पासपोर्ट बनवाने के लिए आवेदन किया और पुलिस को उसमे संलग्न किये गए रासन कार्ड व् पैन कार्ड आदि कागजातों के कूटरचित होने का संदेह हुआ। जब मामले की जांच की गयी तो सारे दस्तावेज फर्जी मिले पुलिस ने तीनो युवको चौरहट के समीप उस वक्त गिरफ्तार किया जब ये तीनो इलाका छोड़कर कही भागने की फिराक में थे। फिलहाल पुलिस ने तीनो बंगलादेशी युवको को जेल भेज दिया और आरोपी बाबू के खिलाफ मामला दर्ज कर मामले की जांच में जुट गयी थी।

● आंकड़े पर नजर डाले तो ग्रामीण व नगर पालिका क्षेत्रो में केवल मुगलसराय कोतवाली क्षेत्र में 2 हजार से अधिक बंगलादेशियो का बसेरा है जो खुफिया विभाग के कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़े करती है। ये बांग्लादेशी अपना आशियाना वहां चुनते है जहाँ इनके समुदाय विशेष के ग्राम प्रधान व वार्ड मेम्बर हो। वोट के लालच में पहले बहुत आसानी से सभासद व प्रधान के लेटर पैड पर आधार बन जाता था,फिर राशन कार्ड और चुनाव से पहले वोटर कार्ड तैयार हो जाता था।

●खुफिया एजेंसियों की दिक्कत तब शुरू होती है जब जांच के दौरान उन्हें आधार, पैन, वोटर कार्ड सब दिखा दिया जाता है और ये वैरिफाई हो जाता है कि ये लोग बांग्लादेशी नही बल्कि प बंगाल के किसी जिले के हैं।लेकिन जब ये पासपोर्ट के लिए आवेदन करते है तो इनके मूल निवास पर ऐसा कोई नही मिलता और ये पकड़े जाते हैं।अब सवाल यह भी है कि क्या सिर्फ पासपोर्ट बनवाने वाले ही अवैध घोषित होंगे या एजेंसियों के पास वैरिफिकेशन का दूसरा कोई विकल्प भी है।

Leave a Comment

error: Content is protected !!