
चकिया । ब्लाक संसाधन केंद्र चकिया के प्रशिक्षण हॉल में बुधवार को अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में टीईटी अनिवार्यता को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के 1 सितंबर 2025 के आदेश के विरोध में रणनीति तैयार की गई। साथ ही 13 अप्रैल 2026 को जिला मुख्यालय पर प्रस्तावित मशाल जुलूस को सफल बनाने का आह्वान किया गया।
बैठक की अध्यक्षता अच्युतानंद त्रिपाठी ने की, जबकि संचालन चंद्र प्रकाश गांधी ने किया।
मुख्य वक्ता के रूप में उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष आनंद कुमार पाण्डेय ने कहा कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों पर नई पात्रता शर्तें लागू करना उनके अनुभव का अपमान है। उन्होंने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता केवल प्रमाणपत्रों से नहीं, बल्कि शिक्षकों के अनुभव से तय होती है।

अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के महामंत्री उपेंद्र बहादुर सिंह ने टीईटी अनिवार्यता को मानसिक उत्पीड़न बताते हुए शिक्षकों से एकजुट रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि सभी शिक्षक मिलकर 13 अप्रैल के मशाल जुलूस को ऐतिहासिक बनाएंगे।
ब्लॉक अध्यक्ष नरेंद्र प्रताप यादव ने भरोसा दिलाया कि चकिया और शहाबगंज क्षेत्र के शिक्षक बड़ी संख्या में शामिल होंगे। जिला कोषाध्यक्ष शशि कांत गुप्त ने कहा कि आरटीई अधिनियम से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर नई शर्तें लागू करना न्यायसंगत नहीं है।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि यदि सरकार ने इस मुद्दे पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा।
इस अवसर पर आनंद कुमार पाण्डेय, राम इच्छा सिंह, उपेंद्र बहादुर सिंह, सच्चिदानंद पांडेय, भूपेंद्र यादव, हरेंद्र सिंह, धीरेन्द्र विक्रम सिंह, देवेंद्र प्रताप सिंह, रामदिलास, नरेंद्र यादव, शशि कांत गुप्त, अजय सिंह सपना, भोला, अच्युतानंद त्रिपाठी, महेंद्र मौर्य, शाहबाज आलम, संदीप दुबे, विवेकानंद त्रिपाठी, जितेंद्र तिवारी, कुंवर कलाधर सिंह, इमरान अली, संतोष त्रिपाठी, मुसाफिर यादव, अरविंद कौशल, अभय सिंह, विनोद त्रिपाठी, धीरेन्द्र कुमार, शशि कांत राय, प्रवीण पाण्डेय, चंद्रशेखर गुप्ता, चंद्रभान सिंह, लालजी, ओमप्रकाश, राजेंद्र सोनकर, वरुदेंद्र पाठक, संतोष वर्मा, राजकिशोर, अनिल कुमार सहित अन्य शिक्षक उपस्थित रहे।