
चकिया । दान, त्याग, पराक्रम, उदारता और विद्या से सुसंपन्न जिनके हृदय में रघुवीर विराजमान होते हैं, वही सच्चे अर्थों में महावीर कहलाते हैं। यह बातें काशी से पधारे कथावाचक मारुति किंकर जी महाराज ने गुरुवार को इलिया कस्बा में मां काली सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित नव दिवसीय श्रीराम कथा के प्रथम दिवस पर श्रोताओं को कथा का श्रवण कराते हुए कही।
उन्होंने कहा कि श्रीरामचरितमानस में दो विरोधी विचारधाराएं स्पष्ट रूप से देखने को मिलती हैं। एक ओर भगवान श्रीराम का आदर्श, मर्यादित और धर्मपरायण चरित्र है, वहीं दूसरी ओर रावण का अहंकार और अविद्या से युक्त जीवन है। भगवान श्रीराम के जीवन में जहां विद्या, मर्यादा और धर्म का पालन है, वहीं रावण के जीवन में अधर्म, अहंकार और अज्ञान का वास दिखाई देता है।
मारुति किंकर जी महाराज ने हनुमानजी के चरित्र का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके भीतर महाविद्या का समावेश है। वे न केवल परम विद्वान हैं, बल्कि पूर्ण रूप से प्रभु श्रीराम के प्रति समर्पित भी हैं। उन्होंने कहा कि स्वधर्म के पालन में तत्परता, आचरण में पवित्रता और व्यवहार में नैतिकता ही सच्ची विद्या है, जबकि इसके विपरीत आचरण अविद्या कहलाता है।

उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में भगवान राम के आदर्शों को अपनाएं और धर्म के मार्ग पर चलते हुए समाज में सकारात्मक बदलाव लाएं। कथा के प्रथम दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और पूरा पंडाल भक्ति रस में सराबोर हो गया।
इस अवसर पर राजकुमार गुप्ता, सुरेश मद्धेशिया, राधाकृष्ण जायसवाल, राजेश गुप्ता, हनुमान चौरसिया, पिंटू गुप्ता, संजय गुप्ता, जोगिंदर सिंह, सुरेंद्र सिंह सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।