बुद्धमित्र मुसाफिर बोले: 1 अप्रैल आधुनिक भारत का ऐतिहासिक दिन

अशोक कुमार जायसवाल
पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर (मुगलसराय) में 1 अप्रैल को ‘अम्बेडकर माह’ के पहले दिन ‘रन फॉर अम्बेडकर’ जनजुलूस निकाला गया। इस अवसर पर अखिल भारतीय अनुसूचित जाति/जनजाति कर्मचारी कल्याण संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष बुद्धमित्र मुसाफिर ने कहा कि 1 अप्रैल आधुनिक भारत के इतिहास का एक महत्वपूर्ण दिन है।

मुसाफिर ने बताया कि डॉ. भीमराव अंबेडकर के शोधकार्य ‘द प्रॉब्लम ऑफ रुपी’ के आधार पर वर्ष 1935 में भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना हुई थी। इससे देश की आर्थिक व्यवस्था को नई दिशा मिली और भारत वैश्विक स्तर पर एक मजबूत अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा।

उन्होंने अप्रैल माह को ‘अम्बेडकर माह’ के रूप में मनाने की शुरुआत को एक सराहनीय कदम बताया। उनके अनुसार, बाबा साहब ऐसे महापुरुष हैं जिनकी जयंती पूरे माह विभिन्न रूपों में मनाई जाती है।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि प्रांतीय अध्यक्ष अशोक कुमार प्रबुद्ध ने कहा कि बाबा साहब को केवल एक वर्ग तक सीमित करना उनके योगदान का अपमान है। उन्होंने वंचित वर्गों, महिलाओं, कर्मचारियों और राष्ट्र की एकता-अखंडता के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए।

यह दौड़ दामोदर दास पोखरे से शुरू होकर अलीनगर मोड़ तक पहुंची, जिसमें हजारों लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व को बढ़ावा देना तथा संविधान के मूल्यों को मजबूत करना था। साथ ही जातिविहीन समाज की स्थापना का संकल्प भी दोहराया गया।

इस कार्यक्रम में अवाजका टीम, BBS-3 टीम, रमाबाई महिला एसोसिएशन और ऑल इंडिया डॉक्टर अंबेडकर एसोसिएशन सहित विभिन्न संगठनों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।

बुद्धमित्र मुसाफिर ने यह भी स्पष्ट किया कि आगामी जनगणना (2026-27) में ‘धर्म’ कॉलम में ‘बौद्ध’ लिखने पर अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के आरक्षण पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट और भारत सरकार के 3 जून 1990 के गजट में भी इसका समर्थन किया गया है।

जुलूस में डॉ. रवि, विनोद, महेंद्र, संजीत भारती, डॉ. चंद्रभानु, सोनू किन्नर और राजूराव अंबेडकर सहित हजारों लोग शामिल थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता दिनेश चंद्रा ने की तथा संचालन सुरेश अकेला ने किया।