
मुगलसराय के हापड़ कॉलोनी स्थित परशुरामपुर के काली मंदिर प्रांगण में बुधवार को यादव समुदाय द्वारा पारंपरिक कराह पूजा का आयोजन किया गया। इस पूजा में हजारों की संख्या में महिला और पुरुष श्रद्धालु शामिल हुए। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भक्तों की भीड़ देखी गई।

इस कार्यक्रम में नगर के प्रतिष्ठित लोगों के साथ-साथ दूर-दराज से भी श्रद्धालु पहुंचे। बताया गया कि यह आयोजन पिछले लगभग 50 वर्षों से लगातार किया जा रहा है, जो क्षेत्र की एक पुरानी परंपरा है।

कराह पूजा पूर्वी उत्तर प्रदेश में यादव समुदाय की एक प्राचीन लोक परंपरा है, जो भगवान श्री कृष्ण को समर्पित है। इस विशेष अनुष्ठान में भगत (पुजारी) मंत्रोच्चार के बीच उपलों की अग्नि प्रज्वलित करते हैं और उसी पर खौलती खीर या दूध से स्नान करते हैं। इसे तांत्रिक प्रभाव से जुड़ा अनुष्ठान माना जाता है, जिसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्र की समृद्धि, शांति और लोककल्याण है।

मान्यता है कि कराह पूजा किसी विशेष मनोकामना की पूर्ति, सुख-समृद्धि और सामाजिक कल्याण के लिए की जाती है। इस दौरान पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जाता है और आयोजन से कई दिन पहले ही तैयारियां शुरू हो जाती हैं। पूजा के समापन पर भंडारे का आयोजन कर प्रसाद वितरण किया जाता है।

स्थानीय निवासी राकेश कुमार यादव ने बताया कि यह परंपरा भगवान श्री कृष्ण के युग से चली आ रही है और आज भी यदुवंशियों में जीवित है। उन्होंने कहा कि इंद्र देव के प्रकोप से बचाव के संदर्भ में इस पूजा की शुरुआत मानी जाती है और समुदाय में इसकी गहरी आस्था बनी हुई है।
