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मुस्लिम मतदाताओं के नाम काटने की साजिश का सपा विधायक ने लगाया आरोप

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चन्दौली- सकलडीहा विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की कथित साजिश का मामला सामने आया है। समाजवादी पार्टी के विधायक प्रभुनारायण सिंह यादव ने भाजपा पर फर्जी प्रारूप-7 फॉर्म के जरिए मतदाता सूची में हेरफेर करने का गंभीर आरोप लगाया है। इस संबंध में उन्होंने एसडीएम से शिकायत कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
जानकारी के अनुसार सकलडीहा क्षेत्र के खडेहरा और नईकोट गांव में बीते दिनों बीएलओ को कुछ सील पैक लिफाफों में प्रारूप-7 के फॉर्म प्राप्त हुए। इन फॉर्मों में मतदाताओं का नाम, पिता का नाम और पता पहले से भरा हुआ था। जांच में सामने आया कि ये सभी फॉर्म मुस्लिम समुदाय के मतदाताओं से संबंधित थे, जबकि इन मतदाताओं का एसआईआर पहले ही पूरा हो चुका था।

विधायक प्रभुनारायण सिंह यादव

●मामले की भनक लगते ही गांवों में हड़कंप मच गया। स्थानीय सपा बीएलए ने इसकी सूचना विधायक प्रभुनारायण सिंह यादव को दी। शनिवार को विधायक ने एसडीएम कुंदन राज कपूर से मुलाकात कर पूरे मामले से अवगत कराया और तत्काल जांच व कार्रवाई की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो पार्टी आंदोलन करने को मजबूर होगी।

●विधायक प्रभुनारायण सिंह यादव ने बताया कि खडेहरा गांव में 18 और नईकोट गांव में 14 मुस्लिम मतदाताओं को प्रारूप-7 के फॉर्म भेजे गए थे, जिनका उपयोग मतदाता सूची से नाम काटने के लिए किया जाता है। उन्होंने इसे संविधान विरोधी कृत्य बताते हुए आरोप लगाया कि चुनाव में धांधली की साजिश रची जा रही है। विधायक का कहना है कि ये फॉर्म कंप्यूटर पर टाइप कराकर बीएलओ को भेजे गए।

उन्होंने दावा किया कि फर्जी प्रारूप तैयार करने वालों की पहचान कर ली गई है और यदि प्रशासन ने शीघ्र मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई नहीं की तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। इस दौरान प्रभात यादव, नागेपुर प्रधान सुरेंद्र यादव, पिंटू यादव, पुत्तुल यादव, भोला यादव सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और सपा कार्यकर्ता मौजूद रहे।


● इस मामले पर एसडीएम कुंदन राज कपूर ने बताया कि उन्हें शिकायत प्राप्त हुई है और संबंधित बीएलओ से रिपोर्ट तलब की गई है। उन्होंने कहा कि पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी और यदि कोई दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

●एसडीएम ने स्पष्ट किया कि पिछले छह माह से किसी भी मतदाता का नाम सूची से नहीं काटा गया है। बीएलओ से फॉर्म आने के बाद लेखपाल, तहसीलदार और उनके स्तर पर जांच के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाता

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