
चन्दौली- शहाबगंज विकासखंड के ग्राम पंचायत तियरा स्थित महारथपुर में 2 लाख 55 हजार रुपये की लागत से निर्मित अमृत सरोवर उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद सवालों के घेरे में आ गया है। उद्घाटन के समय से ही यहां असुरक्षा और अव्यवस्था की स्थिति साफ दिखाई देने लगी थी, जिससे योजना की सफलता पर संदेह पैदा हो गया है।
●गणतंत्र दिवस 26 जनवरी को अमृत सरोवर के उद्घाटन अवसर पर विधायक कैलाश आचार्य, जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग एवं मुख्य विकास अधिकारी आर. जगत साई की मौजूदगी में भी सुरक्षा व्यवस्था कमजोर नजर आई। समारोह के दौरान एक तरफ जिलाधिकारी समारोह को संबोधित कर रहे थे तो वहीं सजावट के लिए लगाए गए गुब्बारे बच्चों से लेकर बड़ों तक तोड़कर अपने साथ उठा ले गए। जिससे कार्यक्रम की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो गए। उद्घाटन के तीन दिन के भीतर ही सरोवर में लगी दोनों नौकाएं खराब हो गईं, जिन्हें बाहर निकालना पड़ा। वहीं ग्रामीणों के स्वास्थ्य लाभ के उद्देश्य से लगाए गए ओपन जिम के उपकरणों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
●स्थानीय लोगों का कहना है कि जब उद्घाटन के समय जिले के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे और उसी दौरान यह स्थिति देखने को मिली, तो आगे चलकर सरोवर की सुरक्षा और रखरखाव कैसे सुनिश्चित होगा यह चिंता का विषय है।
●अमृत सरोवर सुनसान स्थान पर स्थित होने के कारण असामाजिक तत्वों से नुकसान की आशंका भी जताई जा रही है। बता दें कि अमृत सरोवर का उद्देश्य भूजल स्तर में सुधार, सिंचाई की सुविधा, ग्रामीणों के लिए टहलने का ट्रैक, रात्रि में प्रकाश व्यवस्था, हाई मास्क लाइट व सोलर लाइट के माध्यम से सौंदर्यीकरण तथा स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो यह योजना अपने उद्देश्य से भटकती नजर आ सकती है। अमृत सरोवर के रखरखाव की जिम्मेदारी राधा आजीविका स्वयं सहायता समूह को दी गई है, लेकिन उद्घाटन के दिन से ही सुरक्षा और साफ-सफाई व्यवस्था को लेकर सवालिया निशान लग गया है।

●ग्रामीणों ने प्रशासन से नियमित निगरानी और ठोस सुरक्षा व्यवस्था की मांग की है। अब देखना यह होगा कि समय के साथ महारथपुर में बने इस अमृत सरोवर की सुरक्षा, रखरखाव और उपयोगिता कितनी प्रभावी साबित होती है, या फिर यह योजना भी लापरवाही की भेंट चढ़ जाती है।