[smartslider3 slider="2"]

HIV का हब बनता जा रहा डीडीयू जंक्शन, नशेड़ी ही नही रेलकर्मी भी चपेट में

Connect With Social Media

पीडीडीयू नगर-(सचिन पटेल की रिपोर्ट) जागरूकता ही बचाव है ये बाते काफी समय से बताई जा रही है लेकिन क्या ये महज विज्ञापन तक सीमित है! आखिर कब तक लोग अज्ञानता के कारण अपने और अपने परिवार की जिंदगी से खिलवाड़ करेंगे!जी हां हम बात कर रहे है एसआईवी संक्रमण की जिसकी जागरूकता के लिए कार्य कर रही टीआईयूपीएंपी प्लस की टीम ने गत सितंबर से दिसंबर के बीच रेल परिसर में एचआईवी संक्रमित 10 मरीज ट्रेस किया।जिनमे घुमंतू युवक युवतियों के अलावा कुछ रेल कर्मी भी पॉजिटिव मिले है।

●इस सम्बन्ध में टीआईयूपीएंपी प्लस के परियोजना निदेशक राकेश सिंह ने बताया कि सभी मरीजो को चन्दौली के एआरटी सेंटर में इलाज कराया जा रहा है।उन्होंने बताया कि वर्तमान में 68 मरीजो का इलाज जारी है। सरकारी ऑंखडे की माने तो वर्ष 2025- 26 में कुल 32 संक्रमित मरीज चिन्हित हुए वही वर्ष 2024-25 में 68 मरीज ट्रेस किये गए थे।संस्था द्वारा किये गए कार्यो के आधार पर जिले में डीडीयू जंक्शन के अलावा काली महाल,चंदासी,दुलहीपुर, पड़ाव चौराहा,चहनियां,नौबतपुर समेत कुल 10 संवेदनशील जोन पाए गए है जहाँ एचआईवी संक्रमित मरीजो के पाए जाने की संख्या बढ़ रही है।डीडीयू रेलवे परिसर में मिली इतनी बड़ी संख्या ने स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा दिया है।

●इस संबंध में जिला क्षय रोग अधिकारी राजेश सिंह ने बताया कि एचआईवी के सिन्ट्रोम शरीर मे रोग से लड़ने वाले सिस्टम को ध्वस्त कर देते है और दिनोदिन इंसान कमजोर होने लगता है। पं कमलापति त्रिपाठी हॉस्पिटल चन्दौली,राजकीय महिला चिकित्सालय मुग़लसराय के अलावा कई सरकारी अस्पतालों में एआरटी सेंटर बनाये गए हैं जहाँ जांच व इलाज की निःशुल्क व्यवस्था है।साथ ही अपील किया असुरक्षित यौन संबंध न बनाये,संक्रमित खून न चढ़वाएं जागरूकता से ही बचाव संभव है।

●क्या है HIV !
एचआईवी (ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस) एक ऐसा वायरस है जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System), विशेषकर CD4 कोशिकाओं को नष्ट करके उसे कमज़ोर कर देता है। यह संक्रमित रक्त, वीर्य, स्तनपान या असुरक्षित यौन संबंधों के माध्यम से फैलता है। समय पर उपचार न मिलने पर यह गंभीर बीमारी एड्स (AIDS) में बदल सकता है। हालांकि इसका कोई इलाज नहीं है, लेकिन एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (ART) दवाओं से इसे नियंत्रित कर सामान्य जीवन जिया जा सकता है।

Leave a Comment

error: Content is protected !!