
डीडीयू नगर । अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर रविवार सायंकाल हिनौली गांव में राष्ट्रीय सामाजिक संस्था शी मूवमेंट फाउंडेशन की ओर से “महिला: वर्तमान और भविष्य की चुनौतियां” विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम में महिलाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और समाज में व्याप्त भेदभाव, शिक्षा और अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार रखे।
परिचर्चा में महिलाओं ने कहा कि जन्म से लेकर जीवन के अंतिम पड़ाव तक महिलाओं का जीवन कई चुनौतियों से घिरा रहता है। आज भी बेटियों और महिलाओं को घर-परिवार में बराबरी का अधिकार पूरी तरह नहीं मिल पाता है। सामाजिक और आर्थिक स्तर पर भेदभाव की स्थिति अभी भी व्यावहारिक रूप से देखने को मिलती है।
महिलाओं ने कहा कि बेटियों की पढ़ाई और उनकी प्रतिभा को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। कई बार पढ़ी-लिखी बहुओं को भी घर की चारदीवारी तक सीमित कर दिया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ अब शहरी समाज में भी महिलाओं के साथ भेदभाव की स्थिति साफ दिखाई देने लगी है। संविधान और कानून की जानकारी के अभाव में महिलाएं अपने अधिकारों का सही उपयोग नहीं कर पातीं।
संस्था के वक्ताओं ने कहा कि चुनौतियां जरूर हैं, लेकिन जागरूकता और कानून की समझ से इनका सामना किया जा सकता है। बेटियों को अच्छी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देकर उन्हें आत्मनिर्भर और सक्षम बनाया जा सकता है। बेटा और बेटी दोनों को समान अवसर और समझ देने से समाज में सकारात्मक बदलाव संभव है।
वक्ताओं ने यह भी कहा कि घर और समाज में महिलाओं के लिए अवसर पैदा कर पुरुषों की सोच में बदलाव लाया जा सकता है। कानून की सही जानकारी होने से महिलाएं शासन-प्रशासन तक अपनी बात मजबूती से रख सकती हैं और अपने अधिकारों की रक्षा कर सकती हैं।
परिचर्चा के अंत में महिलाओं ने संकल्प लिया कि वे बेटियों को उच्च और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाने के लिए प्रयास करेंगी, एक-दूसरे का सहयोग करेंगी और समाज में समानता के लिए जागरूकता बढ़ाएंगी।
कार्यक्रम में आशा देवी, उमरावती, शैलजा कुमारी, छाया कुमारी, सविता देवी, सरिता, गीता मौर्या, संजय प्रसाद, मनोज, अमित, संस्था की ओर से सिद्धार्थ, यासिर जावेद, मरियम, अधिवक्ता शिवम यादव और रामाशीष यादव एड समेत कई ग्रामीण मौजूद रहे।