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शिव पार्वती विवाह प्रसंग सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु,रामकथा के दूसरे दिन उमड़ी भीड़

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कमालपुर (चंदौली)। स्थानीय कस्बा स्थित राम जानकी मंदिर के प्रांगण में आयोजित नौ दिवसीय श्री राम कथा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। अयोध्या से पधारे कथावाचक श्री राहुल दास महाराज जी ने भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का ऐसा सजीव वर्णन किया कि पाण्डाल में मौजूद भक्त भक्ति रस में डूब गए।
सत्संग से होता है जीव का कल्याण
कथा की शुरुआत करते हुए व्यास पीठ से महाराज जी ने सत्संग की महत्ता पर प्रकाश डाला। 

उन्होंने कहा:
“जिस स्थान पर भी प्रभु की कथा या सत्संग हो रहा हो, वहां बिना किसी संकोच के जाना चाहिए। कथा श्रवण मात्र से ही जीव के जन्म-जन्मांतर के पाप कट जाते हैं और कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है।”
इस दौरान उन्होंने यक्ष और माता सती के प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धा और विश्वास के महत्व को समझाया।
कठोर तप और शिव-पार्वती विवाह का प्रसंग
महाराज जी ने माता पार्वती के जन्म और उनके संकल्प की कथा सुनाते हुए बताया कि:
तपस्या: माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए वर्षों तक कठोर तप किया।
मार्गदर्शन: देवर्षि नारद के मार्गदर्शन पर चलकर उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी श्रद्धा को अडिग रखा।
अनोखी बारात: जब भगवान शिव की बारात पहुंची, तो उनके निराले स्वरूप और उल्टे बैल पर सवार दूल्हे को देखकर माता सुनैना (पार्वती जी की माता) मूर्छित हो गईं। बाद में देवताओं के समझाने पर और शिव के वास्तविक स्वरूप को जानकर विवाह संपन्न हुआ।


इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति
कथा के दौरान पूरा परिसर ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय श्री राम’ के उद्घोष से गुंजायमान रहा। इस अवसर पर मुख्य रूप से निम्नलिखित भक्तगण उपस्थित रहे:

लालजी यादव,रवींद्र नाथ दुबे, कामता जायसवाल, श्यामनारायण साहू, अमरनाथ जायसवाल, संजय गुप्ता, विपिन रस्तोगी, शंकर मौर्या,लल्लन रस्तोगी,राजेंद्र मौर्य, त्रिलोकीनाथ जायसवाल,शंकर प्रसाद गुप्ता, गोविंद जायसवाल, ओमकार रस्तोगी इत्यादि।

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