
चकिया । शहाबगंज विकासखंड के मगरौर गांव में स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। गांव में करीब पांच वर्ष पूर्व स्वच्छ भारत मिशन के तहत लाखों रुपये की लागत से निर्मित सामुदायिक शौचालय आज बदहाली का शिकार है। शौचालय के दरवाजे टूटकर गिर चुके हैं और अंदर गंदगी का अंबार लगा है, जिससे ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं और बुजुर्गों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि शौचालय निर्माण के समय इसे गांव के लिए बड़ी सौगात बताया गया था, लेकिन रखरखाव के अभाव में इसकी स्थिति दिन-ब-दिन खराब होती गई। दरवाजे टूटे होने के कारण महिलाएं शौच के लिए जाने में असहज महसूस करती हैं, जबकि बुजुर्गों के लिए भी इसका उपयोग करना मुश्किल हो गया है।
जानकारी के अनुसार शौचालय की देखरेख और साफ-सफाई की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को सौंपी गई है। इसके लिए समूह के खाते में प्रति माह छह हजार रुपये की धनराशि भी भेजी जाती है। बावजूद इसके, नियमित सफाई और मरम्मत नहीं होने से शौचालय अनुपयोगी होता जा रहा है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि जब रखरखाव के लिए धनराशि मिल रही है तो फिर शौचालय की ऐसी स्थिति क्यों है।

इस संबंध में एडीओ पंचायत अरविंद सिंह ने बताया कि शौचालय के रखरखाव की जिम्मेदारी समूह की महिलाओं को दी गई है। यदि जांच में लापरवाही या अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले की जांच कर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
ग्रामीणों ने प्रशासन से शीघ्र मरम्मत और नियमित सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि गांव में स्वच्छता अभियान का उद्देश्य पूरा हो सके।