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अब इतिहास के पन्नों में दफन हो जाएगी जीटी रोड,चौड़ीकरण में गुम हुई पहचान

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चन्दौली(मनोहर कुमार की कलम से)– उत्तरा पथ से सड़क-ए-आजम, बादशाही सड़क होते हुए जीटी रोड अब किया जा रहा चौड़ीकरण जी हां देश में इस समय सड़क का निर्माण तेजी किया जा रहा है। इस के लिए कई परियोजना कार्य कर रही है।जनपद में भी कई क्षेत्रों में सड़क निर्माण हो रहा है । वहीं पड़ाव से मुगलसराय तक जीटी रोड का चौड़ी करण किया जा रहा है। पड़ाव से सुभाष पार्क तक सिक्स लेन व इसके बाद फोर लेन हो रहा है।सड़क चौड़ीकरण के साथ ही जी टी रोड का अस्तित्व समाप्त हो गया।यह इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है।हालांकि इसका अस्तित्व मिटा नहीं है।बल्कि उस पर चौड़ीकरण की परत चढ़ रही है। इसे आधुनिक तरीके और साज सज्जा के साथ बनाया जा रहा है ।

जी टी रोड (ग्रैंड ट्रंक रोड) का पुनर्निर्माण और आधुनिकीकरण 16वीं शताब्दी में शेरशाह सूरी द्वारा कराया गया था, जिसने इसे “सड़क-ए-आजम” नाम दिया। हालांकि, इस मार्ग का प्राचीन मूल रूप चंद्रगुप्त मौर्य के शासनकाल में 300 ईसा पूर्व के आसपास बना था, जिसे “उत्तरापथ” कहा जाता था।


इस सड़क को आधुनिक रूप शेरशाह सूरी 16वीं शताब्दी दिया था। प्राचीन निर्माता चंद्रगुप्त मौर्य 300 ईसा पूर्व के आसपास हैं।इस सड़क का मूल नाम उत्तरापथ था।बाद में यह सड़क-ए-आजम, बादशाही सड़क भी हुआ। इस सड़क का आधुनिक नाम ग्रैंड ट्रंक (GT) रोड जिसका पुनर्निर्माण 19वीं सदी में लॉर्ड ऑकलैंड ने कराया था।यह एशिया की सबसे लंबी और पुरानी सड़कों में से एक है।

ग्रैंड ट्रंक रोड का इतिहास हजारों साल पुराना है. मौर्य काल से लेकर अंग्रेजों के समय तक इसमें कई बदलाव आए। दिल्ली में शासन करने वाले अनेक शासकों में से एक का नाम था शेर शाह सूरी. शेर शाह सूरी ने सिर्फ 5 साल तक दिल्ली पर शासन किया। लेकिन फिर भी शेर शाह सूरी का नाम पूरा हिंदुस्तान जानता है। पहले
जिसे हम ग्रैंड ट्रंक रोड के नाम से जानते हैं इसका नाम हमेशा से ये नहीं था।समय समय पर इसे अलग अलग नामों से बुलाया गया।मसलन उत्तरापथ। सड़क-ए-आज़म, बादशाही सड़क, ग्रैंड ट्रंक रोड।

अफ़ग़ानिस्तान में काबुल से लेकर उत्तर भारत के कई बड़े शहरों से होकर गुजरती है।
बचपन से हम पढ़ते आए कि ग्रैंड ट्रंक रोड का निर्माण शेर शाह सूरी ने किया था।बात सही है लेकिन टेक्निकली इसमें कुछ पेंच हैं. मसलन शेर शाह सूरी के वक्त में इसका नाम ग्रैंड ट्रंक रोड नहीं था।और ऐसा भी नहीं था कि शेर शाह से पहले कोई रास्ता नहीं था।
बौद्ध और पौराणिक ग्रंथों में जिक्र मिलता है कि उत्तरा पथ का इस्तेमाल विशेष रूप से घोड़ों के व्यापार के लिए किया जाता था।और आगे चलकर ये सिल्क रूट का हिस्सा भी बना।

ये मार्ग आठ चरणों में बना हुआ है. तक्षशिला से सिंधु तक. वहां से झेलम तक. आगे सतलज तक और सतलज से यमुना तक”। शेर शाह सूरी का राज़ साल 1540 में शुरू हुआ।शेर शाह सूरी ने हिंदुस्तान पर अपनी पकड़ मजबूत करनी शुरू की। इसी उद्देश्य के चलते उन्होंने सड़कों का निर्माण शुरू किया। इन सड़कों के निर्माण के पीछे मुख्य उद्देश्य ये था कि सेना आराम से ट्रेवल कर सके।लेकिन धीरे धीरे ये पूरा रास्ता जिसे शेर शाह सूरी के वक्त में सड़क-ए-आज़म कहा जाता था, व्यापार का एक सुलभ साधन बन गया।

शेर शाह सूरी ने इस रास्ते को पक्का करवाया

शेर शाह सूरी के समय में इस सड़क को पक्का किया गया। यात्रा के लिए जगह जगह पर सराय बनाए गए. दिल्ली में ये जितने सराय आप सुनते हैं. कालू सराय, बेर सराय, सराय काले खां, ये सब ग्रांट ट्रंक रोड और उससे जुड़ी सड़कों पर ही बनाए गए थे. इन सराय में न सिर्फ रहने का इंतजाम था. बल्कि मुफ्त खाना भी मिलता था।

शेरशाह सूरी के बाद अंग्रेजों ने इस मार्ग का फिर से निर्माण करवाया और इसका नाम बदलकर ग्रांड ट्रंक रोड (जीटी रोड)कर दिया जहांगीर के समय तक ग्रैंड ट्रंक रोड के किनारे 600 कोस मीनारें बनाई जा चुकी थीं. इनके अलावा मुग़ल काल में सराय भी और भव्य बनाए गए. बाकायदा सराय ऐसे बनाए गए जिनमें बादशाह के रहने के लिए कमरा बना होता था. और पूरे ठाठ बाट का इंतजाम होता था.

ब्रिटिश रूल के दौरान
मुग़लों के बाद आया अंग्रेजों का काल. इस दौर तक एक खास बात जो देखने में आई थी वो ये थी कि ग्रैंड ट्रंक रोड के आसपास के इलाके काफी तेज़ी से फले फूले थे. इनका विकास बाकी इलाकों से ज्यादा तेज़ी से हुआ था. जिसका एक मुख्य कारण था, रोड के आसपास ट्रेड को बढ़ावा मिलना. इसलिए जब अंग्रेज़ आए तो उन्होंने अपने फायदे के लिए इस रोड को पक्का करवाने का काम शुरू किया। ब्रिटिश रिकार्ड्स के अनुसार तब हर एक मील को पक्का करने पर 1000 पौंड रकम का खर्चा आया था. बाकायदा जिसे हम पी डब्लू डी के नाम से जानते हैं।यानी पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट, उसकी शुरुआत अंग्रेजों ने इसी सड़क के निर्माण और रख रखाव के लिए की थी। पिछले कई वर्षों से शहर में जी टी रोड गुजरी थी।बढ़ते यातायात साधनों और जाम से बचाने और यातायत को सुलभ बनाने के लिए सड़क का चौड़ीकरण किया जा रहा है।

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