
चकिया – भारत का सांस्कृतिक मंच के तत्वावधान में शुक्रवार को आदित्य नारायण पुस्तकालय चकिया परिसर में महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती के अवसर पर जन विमर्श एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम सह कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य स्वतंत्रता संग्राम के महान नायकों के विचारों, बलिदान और राष्ट्रवादी चेतना को जन-जन तक पहुंचाना रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ नेताजी सुभाष चंद्र बोस एवं शहीद-ए-आजम भगत सिंह के चित्रों पर माल्यार्पण एवं श्रद्धांजलि अर्पित कर किया गया। इसके पश्चात कार्यक्रम का उद्घाटन शहीद-ए-आजम भगत सिंह विचार मंच के प्रखर कार्यकर्ता एवं वक्ता कॉमरेड श्याम बिहारी सिंह ने अपने विचार रखते हुए किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय परिदृश्य में वैश्विक साम्राज्यवाद विकासशील देशों पर अपना वर्चस्व थोपने का प्रयास कर रहा है। ऐसे समय में भारत सहित दक्षिण एशिया के देशों के लिए समाजवादी दृष्टिकोण और जनपक्षधर विचारों को मजबूत करना आवश्यक है।
●वक्ताओं ने कहा कि भारत का सांस्कृतिक मंच स्वतंत्रता संग्राम के महान नायकों नेताजी सुभाष चंद्र बोस और भगत सिंह के त्याग, बलिदान एवं क्रांतिकारी विचारों से प्रेरणा लेकर कार्य कर रहा है। मंच का उद्देश्य उनके सपनों, विचारों और सिद्धांतों को जन-जन तक पहुंचाना है, ताकि वर्तमान और आने वाली पीढ़ियां राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका समझ सकें।
●जन विमर्श के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि भारत की आज़ादी केवल समझौतों का परिणाम नहीं थी, बल्कि यह जनता की संगठित शक्ति, संघर्ष और बलिदान से प्राप्त हुई है। आज भी उसी चेतना को जीवित रखने की आवश्यकता है।
●जन विमर्श में डॉ. त्रिभिलाल, अजय राय, सुदामा पांडे, रामजी यादव, आदिलराज पाण्डेय, धर्मेंद्र अहमद, पूनम भारती, तेजेंद्र प्रताप, जगजीवन लाल, अनिल, आनंद माया भारती, अब्दुल कादरी, हरिवंश अम्बेडकर, शशि रंजन, हरषचंदन और महासाहब सिंह ‘बहादुरबासी’ सहित अनेक वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए।
●कवि गोष्ठी में कवियों ने देशभक्ति, सामाजिक न्याय और जनसंघर्ष से ओत-प्रोत कविताओं के माध्यम से श्रोताओं में जोश और चेतना का संचार किया। कार्यक्रम के अंत में सभी कवि एवं वक्ताओं को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रश्याम झारखंडी ने की, जबकि संचालन वरिष्ठ साहित्यकार समीम अहमद ने किया। आयोजन की सफलता में भगत सिंह विचार मंच के संयोजक डॉ. त्रिभिलाल पासवान की अहम भूमिका रही। कार्यक्रम शांतिपूर्ण एवं सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।