
चकिया (चंदौली) । सिंचाई विभाग परिसर में शनिवार को बड़ी संख्या में किसानों ने एकत्र होकर प्रदर्शन किया। किसानों का आरोप है कि चन्द्रप्रभा डैम से बिना पूर्व सूचना और सक्षम अधिकारी के लिखित आदेश के करीब 1100 क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जिससे कई गांवों की फसल प्रभावित हुई है। प्रदर्शन कर रहे किसानों ने बताया कि कोदोचक गांव में लगभग 10 बीघा कृषि भूमि पानी में डूब गई, जिससे खड़ी फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। किसानों का कहना है कि सिंचाई विभाग द्वारा समय से पहले पानी छोड़ने से न सिर्फ फसलें बर्बाद हुईं, बल्कि खेतों में जलभराव के कारण अगली बुवाई पर भी असर पड़ सकता है।
किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि वित्तीय वर्ष की ‘मार्च क्लोजिंग’ के चलते विभाग द्वारा नहर में “होल” बनाने या मरम्मत कार्य दिखाने के लिए जानबूझकर पानी छोड़ा गया, ताकि कागजी कार्यवाही पूरी कर खर्च दर्शाया जा सके। किसानों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। संगठन के तहसील अध्यक्ष वीरेंद्र पाल के नेतृत्व में किसानों का प्रतिनिधिमंडल ने एसडीएम विनय मिश्रा और अधिशासी अभियंता हरेंद्र कुमार को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बिना लिखित आदेश पानी छोड़े जाने की जांच, फसल क्षति का सर्वे और मुआवजा दिलाने की मांग की गई। एसडीएम ने मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद किसानों ने धरना-प्रदर्शन समाप्त कर दिया।

किसान नेता विरेन्द्र पाल ने कहा कि यदि भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही दोहराई गई तो किसान व्यापक आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने कहा कि खेती-किसानी पहले से ही मौसम और लागत के दबाव में है, ऐसे में विभागीय लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इस अवसर पर डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव बैंक वाराणसी के डायरेक्टर सुधाकर कुशवाहा, पूर्व विधायक जितेंद्र एडवोकेट, जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि दशरथ सोनकर, टोनी खरवार, गुड़िया यादव, देशराज, वरुण दुबे, सुदामा यादव, सोहन, जुबैर अहमद सहित संगठन के पदाधिकारी व बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।