
चहनिया-चंदौली- खण्डवारी गांव में सड़क निर्माण कार्य के दौरान एक नाबालिग बच्चे के मजदूरी करते मिलने से बाल श्रम पर रोक के सरकारी दावों की पोल खुलती नजर आ रही है। पढ़ने-लिखने की उम्र में बच्चा मजदूरों के साथ फावड़ा चलाकर भस्सी उठाता दिखा, जिससे ठेकेदारों और श्रम विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
फोटो कैप्शन: खण्डवारी में सड़क निर्माण के दौरान भस्सी उठाता नाबालिग बच्चा।
खण्डवारी गांव में चहनियां वाया पीडीडीयू नगर मुख्य मार्ग पर क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत का कार्य चल रहा है। चौराहे पर लंबे समय से सड़क टूटी होने और जलभराव की समस्या को लेकर ग्रामीणों ने 15 जनवरी को प्रदर्शन कर प्रशासन को चेताया था। इसके बाद विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों ने सड़क की मरम्मत शुरू कराई।

मरम्मत कार्य के दौरान मजदूरों के बीच एक नाबालिग बच्चा भी काम करता देखा गया, जो फावड़े से भस्सी उठाकर सड़क निर्माण में जुटा था। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस उम्र में बच्चों को स्कूल में होना चाहिए, उस उम्र में उनसे मजदूरी कराई जा रही है।
सरकार द्वारा बाल श्रम पर सख्त प्रतिबंध और बच्चों को विद्यालय भेजने के निर्देश दिए गए हैं। श्रम मंत्रालय ने भी श्रम विभाग को ऐसे मामलों में नियमित जांच और कार्रवाई करने को कहा है। इसके बावजूद निर्माण कार्य में नाबालिग के लगे होने से विभागीय निगरानी पर प्रश्नचिह्न लग गया है।

ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय अनदेखी और ठेकेदारों की मनमानी के कारण कई मासूम पढ़ाई छोड़कर मजदूरी करने को मजबूर हैं। बाल श्रम कानूनन अपराध है, फिर भी जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
स्थानीय लोगों ने मामले की जांच कर संबंधित ठेकेदारों और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है, ताकि बच्चों को मजदूरी से मुक्त कर शिक्षा से जोड़ा जा सके।