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लूट सको तो लूट ले प्यारे,सभी माल सरकारी है

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मुग़लसराय- फायर ब्रिगेड के बाद राजस्व विभाग का रिश्वत लेते पकड़ा जाना जिले के अन्य कई विभागों के भ्रस्टाचार को उजागर करता है। फायर ब्रिगेड में सिपाही की भूमिका एक मध्यस्थ की थी लेकिन पैसे तो विभाग में कई हाथो में जाने थे,उनका क्या हुआ आखिर जांच में क्या मिला ये भी बड़ा सवाल है।

फायर ब्रिगेड

देखा जाय नगर की तंग गलियों में संचालित गेस्ट हाउसों,होटलो को फायर ब्रिगेड कैसे एनओसी दे देता है जहाँ उनके छोटे वाहन भी नही पहुच पाते। तमाम निजी विद्यालयों को लोकल ब्रांड के एक्सटिंगयूशर पर एनओसी,रसूखदारों को उनके प्रभाव से एनओसी ऐसे और कई मामले है जिन पर से पर्दा उठ सकता है लेकिन उठाये कौन जब छोटी मछली को पकड़ने और बड़ी मछली को क्लीन चिट देना हर विभाग में चल रहा हो।

वीडीए

कमोवेश यही हाल वीडीए का है।पालिका कार्यालय के एक कमरे से संचालित यह कार्यालय भ्रष्टाचार की चरम सीमा पर है। नगर में सुविधा के नाम पर एक भी पार्क नही है फिर भी शुल्क भारी भरकम। इनके विभाग के अधिकारी भ्रस्ट हो ही नही सकते क्योंकि यहां सबकुछ दलालो के माध्यम से चलता है।एंटी करप्शन द्वारा पकड़े जाने का कोई रिस्क नही है।तभी तो बिना पार्किंग के होटल,गेस्ट हाउस इत्यादि का नक्शा पास,पड़ाव से मुग़लसराय तक G प्लस 4 में 4-5 बिल्डिंग नक्शा पास होने के बावजूद सैकड़ो गगनचुम्बी इमारते खड़ी है।इनका सिस्टम भी एक दम पारदर्शी है।नगर की हर गली में इनके दलाल पहले रेकी करते है कि किसके मकान का छत ढलाई की तैयारी शुरू हो रही है।अगले दिन जेई व अन्य कर्मचारी पहुचते है और नक्शा मांगकर न होने पर सील करने की धमकी देकर चले जाते है।दलाल भी साथ होता है लेकिन उसका काम अगले दिन शुरू होता है। वह एक कर्मचारी के साथ जाकर बीच का रास्ता बताता है और मामला सेट हो जाता है।अगर दलाल पैसे लेते पकड़ा भी गया तो उसे आउट साइडर बता कर खुद पवित्र हो जाते हैं।

स्वास्थ्य विभाग

यहां भी एक नया मामला सामने आया जब प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना आयुष्मान में घोटाला पकड़ा गया। केवाईसी कराने जिला अस्पताल पहके युवक को  मरीज बना कर  बिना पर्ची कटाये भर्ती भी कर लिया और उनके खाते से 2310 रुपये कट भी गए। जब इस संबंध में सीएमएस से पूछा गया तो इसे भी आउट साइडर द्वारा मानवीय भूल बता कर मामले को दबाने का प्रयास किया।सवाल यह है कि क्या सरकारी पैसा कोई अन्य व्यक्ति निकाल सकता है? अगर नही तो अस्पताल के सरकारी खाते में जायेगा और उसे अस्पताल प्रशासन ही निकाल सकता है तो सीएमएस की भूमिका पर क्यों न उठे सवाल!!!

शेष अगले अंक में…..अभी खनन,वन,आरटीओ बाकी है…

(महेन्द्र प्रजापति)

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