
चंदौली- जनपद में छुट्टा पशुओं और बंदरों के बाद अब नीलगाय किसानों के लिए नई मुसीबत बनकर उभरी है। क्षेत्र के गंगा किनारे और आसपास के गांवों में नीलगाय के झुंड खेतों में घुसकर खड़ी फसलों को रौंद रहे हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि रोकथाम के लिए अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई है।
गंगा किनारे के रौना, कुरहना, कैली, भूपौली, डेरवा कला, जमुनीपुर, खर्दीपुर, महरखा, बसनी, टड़िया समेत कई गांवों में नीलगाय की संख्या तेजी से बढ़ गई है। दिन-रात खेतों में घुसकर झुंड के झुंड गेहूं, सब्जी, दलहनी और तिलहनी फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। किसान खेतों की रखवाली करने के बावजूद इन्हें रोक नहीं पा रहे हैं।

बसनी गांव के किसान केदार यादव ने बताया कि छुट्टा पशुओं के साथ-साथ अब नीलगाय की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। ये झुंड बनाकर खेतों में पहुंच जाते हैं और खड़ी फसल को पूरी तरह रौंद देते हैं। मेहनत से की गई खेती अब मुनाफे के बजाय घाटे का सौदा बनती जा रही है।



वहीं बसंतु की मड़ई के बाढू पहलवान ने कहा कि पहले क्षेत्र में नीलगाय कम थीं, लेकिन समय रहते कोई रोकथाम नहीं की गई। अब इनकी संख्या काफी बढ़ चुकी है और खेत ही इनका चारागाह बन गए हैं। झुंड के झुंड खेतों में घुसकर फसल चौपट कर रहे हैं।
कैथा उर्फ टड़ियां के उदय भान सिंह ने बताया कि छुट्टा पशुओं की समस्या अभी खत्म भी नहीं हुई थी कि नीलगाय ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। सैकड़ों की संख्या में नीलगाय खेतों में पहुंचकर गेहूं, सब्जी और अन्य फसलों को नुकसान पहुंचा रही हैं। अब तो दिन के उजाले में भी दर्जनों नीलगाय खेतों में घुस जाती हैं और पूरी फसल बर्बाद कर देती हैं।
किसानों का कहना है कि वे रात-रात भर जागकर खेतों की रखवाली कर रहे हैं, फिर भी नीलगायों के झुंड को रोक पाना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने प्रशासन से जल्द से जल्द नीलगाय और छुट्टा पशुओं से निजात दिलाने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है, ताकि उनकी मेहनत की फसल सुरक्षित रह सके।