
चन्दौली-धर्मेन्द्र प्रजापति की रिपोर्ट- चकिया क्षेत्र के हेतिमपुर गांव में स्थित बाबा जागेश्वर नाथ धाम शिव भक्तों की अटूट आस्था का प्रमुख स्थल माना जाता है। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर यहां हर वर्ष दो दिवसीय भव्य मेले का आयोजन होता है। इस वर्ष भी शिवरात्रि मेले को लेकर मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की तैयारी है।
विंध्य पर्वतमाला की पहाड़ियों से घिरे चकिया क्षेत्र की ऐतिहासिक और पौराणिक महत्ता बहुत प्राचीन रही है। इसी क्षेत्र में महर्षि याज्ञवल्क्य की तपोभूमि माने जाने वाले बाबा जागेश्वर नाथ धाम में स्थित स्वयंभू शिवलिंग शिव भक्तों के लिए विशेष आस्था का केंद्र है। सावन के पूरे महीने यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है, विशेषकर सोमवार के दिन भक्त जलाभिषेक और पूजा-अर्चना कर “हर-हर महादेव” के जयघोष से वातावरण को गुंजायमान कर देते हैं।
चकिया तहसील मुख्यालय से लगभग 7 किलोमीटर दूर चंद्रप्रभा नदी के तट पर स्थित यह धाम प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम है। शिवरात्रि और सावन के दौरान दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु यहां दर्शन-पूजन कर अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की प्रार्थना करते हैं।
पौराणिक कथा और मंदिर का इतिहास
मान्यता है कि प्राचीन समय में एक राजा के हाथी को लेकर युद्ध के दौरान एक महावत जंगल में रुका। हाथी के लिए चारा काटते समय उसकी कुल्हाड़ी हाथ से छिटककर एक चट्टान पर गिरी, जहां से रक्त बहने लगा। जब आसपास के लोगों ने देखा तो वहां जमीन में एक शिवलिंग प्रकट हुआ। इसकी जानकारी तत्कालीन काशी नरेश के मंत्री हजारी प्रसाद को दी गई, जिनके निर्देश पर उसी स्थान पर मंदिर का निर्माण कराया गया।
रहस्यमयी कुंड और विशेष मान्यताएं
मंदिर के पास चंद्रप्रभा नदी किनारे एक प्राचीन कुंड है, जिसका पानी सालभर शुद्ध और शीतल बना रहता है। गर्मी के मौसम में भी यह कुंड कभी नहीं सूखता। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस कुंड में निरंतर जल का स्रोत कहां से आता है, इसका रहस्य आज तक अनसुलझा है।
मंदिर के पुजारी बताते हैं कि यहां स्थित स्वयंभू शिवलिंग प्रत्येक वर्ष जौ के दाने के समान बढ़ता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस धाम में दर्शन और पूजा करने से पुराने रोगों से मुक्ति मिलती है, निःसंतान दंपत्तियों को संतान सुख प्राप्त होता है और मानसिक कष्टों से राहत मिलती है।
आस्था, इतिहास और प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण बाबा जागेश्वर नाथ धाम शिवभक्तों के लिए एक विशेष आध्यात्मिक केंद्र बना हुआ है, जहां हर वर्ष शिवरात्रि और सावन में श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ता है।