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नो पार्किंग में सेवादारी को लेकर लीगल इलीगल में ठनी, बिना टेंडर के पार्किंग से रेल राजस्व का नुकसान

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डीडीयू जंकशन- रेलवे सर्कुलेटिंग एरिया में बंद पड़े पार्किंग स्थल में ड्राइवरों में उस वक्त गुट बाजी शुरू हुई जब विगत कई दशक से प्राइवेट नंबर प्लेट वाले वाहनों का कमर्शियल ट्रांसपोर्ट में इस्तेमाल करने वाले ड्राइवरों ने ओला उबर जैसी एजेंसियों के वाहनों को पार्किंग में सवारी बिठाने या उतारने से मना किया। दरअसल ये वाहन स्वामी कई वर्षों से अपने निजी वाहनों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए इस्तेमाल करते आ रहे है बदले में सुरक्षा एजेंसियों को थोड़ी बहुत सेवा भी देते आ रहे है।लेकिन जो वाहन पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए रजिस्टर्ड है और किसी एजेंसी के जरिये उचित कागजात लेकर सड़क पर आई तो बिना नियम तोड़े वह सेवादारी क्यों करे।इसी बात पर दोनों में तनातनी हुई।मौके पर पहुचे जीआरपी  कोतवाल ने रूटीन चेकिंग के नाम पर जब कागजात चेक किये तो सब इधर उधर खिसक लिए। एसएचओ सुनील से इस दौरान काफी दिनों से पार्किंग में खड़े वाहनों की जांच की उसे हटवाने का निर्देश दिया वही कई अन्य ड्राइवरो के भी दस्तावेज जांचे। सवाल यह भी है अगर यह पार्किंग बन्द है तो रेल राजस्व के नुकसान का जिम्मेदार है। आखिर कौन इसे संचालित करा रहा है। बिना टेंडर के पार्किंग संचालन कही रेल अधिकारियों के ऊपरी दानापानी का जरिया तो नही!!

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