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सीएमओ कार्यालय का घेराव, वेतन को लेकर CHO का हंगामा

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चंदौली ( अशोक कुमार जायसवाल ) सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO) का आक्रोश सोमवार को खुलकर सामने आया। सैकड़ों की संख्या में CHO ने वेतन और अन्य लंबित भुगतान की मांग को लेकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वे कई महीनों से बिना वेतन के काम करने को मजबूर हैं, जिससे उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
CHO ने बताया कि उनका नियमित वेतन ही नहीं, बल्कि परफॉर्मेंस बेस्ड इंसेंटिव (PBI) का भुगतान भी लंबे समय से लंबित है। इसके अलावा इन्क्रिमेंट, JAS फंड, TA/DA और कम्युनिकेशन अलाउंस जैसी अन्य देय राशि भी अब तक नहीं मिली है। वेतन न मिलने से परिवार की जिम्मेदारियां निभाना मुश्किल हो गया है। बच्चों की पढ़ाई, इलाज और बैंक की EMI तक प्रभावित हो रही है।


प्रदर्शन के दौरान CHO ने सीएमओ को ज्ञापन सौंपकर सभी लंबित भुगतान तत्काल जारी करने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ तो बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा और सेवा बंद करने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
प्रदर्शन के दौरान सीएमओ कार्यालय पर काफी देर तक नारेबाजी होती रही। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मामले पर जवाब देने से अधिकारी बचते नजर आए, जिससे उनका आक्रोश और बढ़ गया। CHO के आंदोलन से स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका भी जताई जा रही है।


डॉ. युगल किशोर राय, सीएमओ चंदौली:
“CHO का जो भी लंबित भुगतान है, उसे लेकर विभागीय स्तर पर प्रक्रिया चल रही है। उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। जल्द से जल्द भुगतान कराने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि किसी को परेशानी न हो।”
बृजभूषण वर्मा, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी:
“हम लोग कई महीनों से बिना वेतन काम कर रहे हैं। घर चलाना मुश्किल हो गया है। बच्चों की फीस, दवाइयां और EMI तक नहीं भर पा रहे हैं। अगर जल्द भुगतान नहीं हुआ तो हम आंदोलन तेज करेंगे।”
रेणु, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी:
“हम सेवा भावना से काम करते हैं, लेकिन लगातार वेतन न मिलने से मानसिक और आर्थिक दबाव बढ़ गया है। मजबूरी में हमें सड़क पर उतरना पड़ा है। सरकार और प्रशासन से मांग है कि तुरंत भुगतान कराया जाए।”
CHO के इस विरोध प्रदर्शन के बाद स्वास्थ्य विभाग पर दबाव बढ़ गया है। अब देखना होगा कि प्रशासन उनकी मांगों पर कितनी जल्दी कार्रवाई करता है।

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