
डीडीयू नगर- निषाद पार्टी ने मुगलसराय विधायक रमेश जायसवाल से निषाद समाज की विभिन्न जातियों के संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण को लेकर हस्तक्षेप की मांग की है। पार्टी का आरोप है कि निषाद समाज से जुड़ी कई जातियों को अनुसूचित जाति (एससी) की श्रेणी में होने के बावजूद कई जिलों और तहसीलों में गलत तरीके से अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का जाति प्रमाण पत्र जारी किया जा रहा है, जिससे उन्हें योजनाओं और आरक्षण का समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है।

विधानसभा में लोक महत्व का विषय के रूप में उठाने का आग्रह किया है। पत्र में उत्तर प्रदेश शासन के कार्मिक अनुभाग-2 की 31 दिसंबर 2016 की अधिसूचना, शासनादेश संख्या 117/2025/1543/26-3-2025-1690967 दिनांक 16 जून 2025 तथा भारत सरकार और महा रजिस्ट्रार कार्यालय के 8 जनवरी 2022 के आदेशों का हवाला दिया गया है।
पत्र में आरोप लगाया गया है कि इन आदेशों के बावजूद प्रदेश के कई जिलों में निषाद, केवट, मल्लाह, कश्यप, कहार, धीमर, बिंद, बाथम, तुरैहा, गोंडिया, मांझी, मछुआ समेत कई जातियों को ओबीसी प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं, जो शासनादेशों और संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है।

निषाद पार्टी ने मांग की है कि मछुआ समुदाय से जुड़ी सभी जातियों और उपजातियों को ओबीसी प्रमाण पत्र जारी करने पर तत्काल रोक लगाई जाए और शासनादेशों के अनुरूप उन्हें अनुसूचित जाति की जनगणना में शामिल किया जाए। पार्टी ने मझवार और तुरैहा समुदाय को अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र जारी करने तथा मछुआ समुदाय का नाम ओबीसी सूची से हटाने की भी मांग उठाई है।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि 1950 की राष्ट्रपति अधिसूचना, 1961 के जनगणना मैनुअल और 1977 के भारत

सरकार के शासनादेश में इन जातियों का अनुसूचित जाति के रूप में स्पष्ट उल्लेख किया गया है। साथ ही, देश के कई अन्य राज्यों में भी ये जातियां वर्तमान में अनुसूचित जाति की श्रेणी में शामिल हैं।
निषाद पार्टी ने विधायक रमेश जायसवाल से आग्रह किया है कि वे इस महत्वपूर्ण विषय को विधानसभा में प्रभावी ढंग से उठाकर निषाद समाज को उनके संवैधानिक अधिकार और सरकारी योजनाओं का उचित लाभ दिलाने की दिशा में ठोस पहल करें।