
चंदौली। यूजीसी के नए कानून के समर्थन में सोमवार को सरदार सेना के कार्यकर्ताओं ने विकास भवन परिसर के पास प्रदर्शन किया। इसके बाद मौके पर पहुंचे एसडीएम राजीव सक्सेना को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों से अवगत कराया।
सवर्ण संगठनों के विरोध पर किया तीखा कटाक्ष
सरदार सेना के पदाधिकारियों ने कहा कि यूजीसी का नया कानून ओबीसी, दलित और दिव्यांग छात्रों को विश्वविद्यालय परिसरों में संरक्षण प्रदान करेगा। उनका आरोप है कि पूर्व में कई विश्वविद्यालयों में जातीय भेदभाव और उत्पीड़न के चलते छात्र आत्महत्या करने को मजबूर हुए हैं।
संगठन ने यूजीसी के नए कानून के विरोध में सवर्ण समाज के कुछ संगठनों द्वारा किए जा रहे प्रदर्शनों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि विरोध करने वाले वही लोग हैं, जो पहले दलित और ओबीसी छात्रों को प्रताड़ित करते थे। अब नए कानून से उनकी मनमानी पर रोक लगेगी, इसी डर से वे विरोध कर रहे हैं।
सरदार सेना के जिला कोषाध्यक्ष दीपक पाल ने कहा कि वर्षों से विश्वविद्यालय परिसरों में पिछड़े, दलित और दिव्यांग छात्रों के साथ जातीय भेदभाव और अत्याचार होता आ रहा है। उन्होंने रोहित वेमुला मामले का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसी सैकड़ों घटनाएं आज भी समाज के सामने मौजूद हैं।

उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2019 से अब तक जातीय भेदभाव के मामलों में 115 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और यह संख्या बढ़कर 378 तक पहुंच गई है, जबकि कई मामले दर्ज ही नहीं हो पाते। साथ ही उन्होंने जातीय जनगणना के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा और कहा कि चुनाव के दौरान की गई घोषणाएं अब तक अधूरी हैं।
प्रदर्शन के दौरान संगठन के जिला अध्यक्ष आनंद पटेल, अनिल शर्मा, अनिल सिंह, जीत नारायण यादव, अभिषेक कुमार, आशीष पटेल, अभय पटेल, चंदन सिंह पटेल सहित कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।