
विशेष रिपोर्ट
मुगलसराय में एक ऐसा परिसर, जहां सुबह-शाम खुलेआम जाम छलकते थे, आज अचानक आग की चपेट में आ गया। हम बात कर रहे हैं वर्षों से बंद पड़े कन्हैया टाकीज परिसर की, जो धीरे-धीरे असामाजिक गतिविधियों का अड्डा बन चुका था।
बताया जाता है कि इस परिसर में सुबह होते ही शराबियों की आवाजाही शुरू हो जाती थी और जैसे-जैसे शाम ढलती थी, पूरा इलाका गरीबों के ‘मिनी बार’ में तब्दील हो जाता था। हैरानी की बात यह है कि परिसर के अंदर वर्षों से चखना-पानी की दुकानें संचालित हो रही थीं, लेकिन प्रशासन और आबकारी विभाग की नजरें इस पर कभी नहीं पड़ीं।
आज सुबह करीब 6:30 बजे लगी आग ने पूरे मामले को उजागर कर दिया। आग लगने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और स्थानीय लोगों की भीड़ जमा हो गई। हालांकि आग पर काबू पा लिया गया, लेकिन इस घटना ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

बड़े सवाल
आखिर क्यों इस परिसर में कभी छापेमारी नहीं हुई?
किसके संरक्षण में चल रहा था यह अवैध ‘ गरीबों का बार’?
क्या स्थानीय प्रशासन जानबूझकर इस ओर से आंखें मूंदे बैठा था?
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। अब आग की इस घटना ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय प्रतिक्रिया
लोगों का कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई की गई होती, तो यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती। आग ने न केवल नुकसान किया, बल्कि प्रशासन की लापरवाही को भी उजागर कर दिया।
अब देखना यह है कि इस घटना के बाद प्रशासन हरकत में आता है या फिर यह मामला भी अन्य घटनाओं की तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।
निष्कर्ष:
कन्हैया टाकीज परिसर में लगी आग एक हादसा जरूर है, लेकिन इसने उस ‘अंधेरे सच’ को उजागर कर दिया है, जिसे लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा था। अब जरूरत है कड़ी कार्रवाई और जिम्मेदारी तय करने की।