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डीडीयू मंडल में तेजी से विस्तार हो रहा टक्कर रोधी कवच सिस्टम

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रिकॉर्ड वैगन मरम्मत, 4.5 किलोमीटर लंबी मालगाड़ी, 180 किमी प्रति घंटा के लिये सफल ट्रायल बढ़ती क्षमता और दक्षता का प्रतीक

डीडीयू नगर।वित्तीय वर्ष 2025-26 में पूर्व मध्य रेल का डीडीयू मंडल संरक्षा, गति और परिचालन दक्षता के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करते हुए एक सशक्त और विश्वसनीय परिचालन मॉडल के रूप में उभरा है। शून्य दुर्घटना का रिकॉर्ड, 180 किमी प्रति घंटा की गति के लिए सफल ट्रायल, 4.5 किलोमीटर लंबी मालगाड़ी का संचालन और आधुनिक तकनीकों का तीव्र विस्तार इस प्रगति के प्रमुख आधार रहे हैं। उक्त बातें मंडल रेल प्रबंधक उदय सिंह मीना ने पत्र प्रतिनिधियों से कहीं।
उन्होंने ने कहा कि संरक्षा के क्षेत्र में मंडल ने महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की है। कवच प्रणाली का कार्य तेजी से प्रगति पर है।जिसके अंतर्गत रेल लाइनों पर टैग लगाए जा रहे हैं। जिससे ट्रेनों की परिचालन स्थिति की सतत जानकारी प्राप्त होती है। रेडियो कम्युनिकेशन आधारित यह प्रणाली ट्रेनों की निरंतर निगरानी सुनिश्चित करती है। ग्रैंड कॉर्ड सेक्शन में अब तक 170.48 रूट किलोमीटर पर लोको ट्रायल सफलतापूर्वक किया जा चुका है। 93 लोकोमोटिव में कवच स्थापित किया गया है। इसके लागू होने से लाल सिग्नल पार करने की संभावना समाप्त होगी और दुर्घटनाओं की आशंका अत्यंत कम हो जाएगी।


सिग्नलिंग के क्षेत्र में ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग को 78.8 रूट किलोमीटर के नए खंड सहित कुल 113 रूट किलोमीटर में लागू किया गया है।जिससे कम समय में अधिक ट्रेनों का सुरक्षित एवं कुशल संचालन संभव हुआ है। साथ ही 7 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग स्थापित कर कुल 39 स्टेशनों को इस प्रणाली से जोड़ा गया है।
गति के क्षेत्र में मंडल ने 25 मार्च 2026 को डीडीयू–गया ग्रैंड कॉर्ड सेक्शन पर 180 किमी प्रति घंटा की गति क्षमता के लिए सफल ट्रायल किया। इस उपलब्धि में 2×25 केवी ओएचई प्रणाली का महत्वपूर्ण योगदान है।जिसका 70% कार्य पूर्ण हो चुका है।परिचालन दक्षता में भी मंडल ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। 4.5 किलोमीटर लंबी ‘रुद्रास्त्र’ मालगाड़ी का सफल संचालन तथा वैगन केयर सेंटर में दिसंबर 2025 में 905 वैगनों का रिकॉर्ड अनुरक्षण, बढ़ती क्षमता और दक्षता का स्पष्ट संकेत है। मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों की समयपालन दर 90.33% रही। जो पिछले वर्ष से 5.46% अधिक है। जबकि 92,453 कोचिंग ट्रेनों का संचालन किया गया।


वित्तीय एवं वाणिज्यिक प्रदर्शन में ₹317.60 करोड़ का 100% पूंजीगत व्यय कर अधोसंरचना, सुरक्षा एवं यात्री सुविधाओं को सुदृढ़ किया गया। कुल आय ₹709.94 करोड़ रही, जिसमें यात्री राजस्व ₹582.21 करोड़ तथा माल ढुलाई 1.118 मिलियन टन दर्ज की गई। टिकट जांच के माध्यम से लगभग 8 लाख मामलों में ₹42.67 करोड़ की वसूली की गई। जो राजस्व सुदृढ़ीकरण का संकेत है।मंडल द्वारा डिजिटल पहल के अंतर्गत टीटीई लॉबी में बायोमेट्रिक साइन-ऑन/ऑफ की सुविधा शुरू की गई। सभी टिकट एवं पार्सल काउंटरों पर क्यूआर आधारित भुगतान प्रणाली लागू की गई है। वहीं स्क्रैप बिक्री से ₹80.50 करोड़ का राजस्व अर्जित किया गया।जो संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन को दर्शाता है।
अधोसंरचना विकास के तहत अमृत भारत स्टेशन योजना में 15 स्टेशनों का उन्नयन, ऊंटारी रोड–मोहम्मदगंज सेक्शन में तीसरी लाइन की कमीशनिंग तथा विभिन्न स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं का विस्तार किया गया।सुरक्षा एवं संरक्षा के क्षेत्र में आरपीएफ द्वारा प्रभावी कार्रवाई करते हुए 69 मामलों में ₹15.28 लाख की रेल संपत्ति बरामद की गई तथा 102 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। ऑपरेशन यात्री सुरक्षा के तहत 176 अपराधियों को पकड़ा गया, जबकि ‘नन्हे फरिश्ते’ अभियान के अंतर्गत 754 बच्चों को सुरक्षित बचाया गया।इन सभी उपलब्धियों के साथ डीडीयू मंडल ने आधुनिक तकनीक, सुदृढ़ अधोसंरचना और प्रभावी प्रबंधन के माध्यम से सुरक्षित, तेज और विश्वसनीय रेल सेवाओं की दिशा में एक सशक्त उदाहरण प्रस्तुत किया है।

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