
चन्दौली- (न्यूज़ डेस्क) मुग़लसराय के ताहिरपुर बंदरगाह स्थित आदि शक्ति लोना माता समाधि स्थल पर सनातन परंपरा में माघ मास की पूर्णिमा को हजारो की संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ इकट्ठी होती है। आदि शक्ति लोना माता को तंत्र साधना में एक अत्यंत शक्तिशाली दिव्य स्त्री और योगिनी के रूप में पूजा जाता है। जिन्हें गुरु गोरखनाथ की शिष्या और कामाख्या क्षेत्र से संबंधित माना जाता है। वे मुख्य रूप से बुरी नजर, तांत्रिक बाधाओं और जादू-टोने से रक्षा करने वाली देवी मानी जाती हैं और शाबर मंत्रों में इनकी दुहाई दी जाती है।


आदि शक्ति लोना माता लोना संत रविदास की धर्मपत्नी थीं। वे एक सरल स्वभाव की महिला थीं और ऐतिहासिक ग्रंथों के अनुसार संत रविदास जी का विवाह 12 वर्ष की आयु में लोना देवी के साथ हुआ था। उनका एक पुत्र विजय दास था। मान्यता है कि जो भक्त संत रविदास जी की जयंती में वाराणसी आते है वे यहां समाधिस्थल पर भी मत्था टेकने जरूर आते हैं।


इस अवसर पर अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार गौतम ने बताया कि आदि शक्ति लोना माता जी संत रविदास की पत्नी थी जिनकी यहां समाधि स्थल है। जो श्रद्धालु वाराणसी के रविदास मंदिर आते है यहां भी मत्था टेकने जरूर आते है।तीन दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम का 2 फरवरी को समापन होगा। तीन दिनों तक लंगर चलेगा जहा हजारो की संख्या में प्रतिदिन श्रद्धालु प्रसाद पा रहे हैं।इस दौरान प्रवचनकर्ता बालचरण, सुजीत कुमार कोषाध्यक्ष,कमलेश,महेंद्र,रविन्द्र,आजाद,संजीव,प्रह्लाद,अनिल,देवेंद्र,मुकुंद,विनोद जी,मनीष,साबिर अंसारी समेत कमेटी के सदस्य व श्रद्धालु उपस्थित रहे।