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अखंड भारत का नक्शा या धरोहर! बदहाली पर बहा रहा आंसू

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चंदौली- अलीनगर के इस्लामपुर स्थित मदरसा इरफान उल उलूम के प्रांगण में कांक्रीट से बना यह नक्शा आजादी से पूर्व का बताया जाता है।आज यह नक्शा अपनी बदहाली पर रुओ रहा है। जीर्ण शीर्ण हाल में पड़े इस नक्शे को एक अदद किसी सरकारी नुमाइंदे के नजरे इनायत की दरकार है। देखा जाय तो अखंड भारत का यह नक्शा एक धरोहर के रूप में संवारा जा सकता है लेकिन इस धरोहर को अधिकारी नजरअंदाज करते चले आ रहे है।मदरसे के मौलाना गुलाम रसूल काजमी की माने तो यह मदरसा सन 1933 ई में मकतब इस्लामिया के नाम से जाना जाता था। जहा कक्षा 5 तक की पढ़ाई हुआ करती थी। बाद में सन 1991 यह मदरसा इरफानुल उलूम में तब्दील हुआ। जहा हाफिज,आलिम व कारी की कक्षाएं चलने लगी। इस नक्शे को तत्कालीन भूगोल विषय के अध्यापक लौंदा गाव निवासी मु जलील ने अपने छात्रों को भारत की भौगोलिक स्थिति व नदिया पहाड़ आदि समझाने के उद्देश्य से बनवाया था।उन्होंने यह भी बताया कि एक बार एक एसडीएम साहब ने सफाई करा कर मरम्मत भी कराई थी लेकिन काफी समय से कोई इधर ध्यान नही देता।नक्शे के बगल में एक कुए की सफाई के दौरान सन 1933 लिखी ईंटे मिली जिससे अंदाजा लगाया जाता है कि उसी दौरान इस नक्शे का निर्माण कराया गया होगा। नक्शे की खास बात यह है कि इसमें बांग्लादेश,अफगानिस्तान,पाकिस्तान को अखंड भारत का हिस्सा दिखाया गया है। नक्शे की बनावट इतनी सटीक है कि कुए का जल जब एक छोर पर गिराया जाता है तो सभी नदियों की दिशा के हिसाब से जल प्रवाहित होता है।

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