
बबुरी(अशोक जायसवाल)-बबुरी कस्बा इन दिनों उत्पाती बंदरों के आतंक से पूरी तरह त्रस्त है। हालात दिन-ब-दिन बदतर होते जा रहे हैं और आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो चुका है। बंदरों का आतंक अब केवल सड़कों और छतों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वे सीधे लोगों के घरों की किचन तक पहुंच जा रहे हैं। किचन में रखे खाने-पीने के सामान को गिराकर बर्बाद कर रहे हैं या उठाकर फरार हो जा रहे हैं, जिससे गृहणियों में भारी भय का माहौल है।
●आए दिन बंदर छोटे-छोटे बच्चों को दौड़ा कर काट रहे हैं। इस कारण अभिभावक बच्चों को अकेले बाहर भेजने से भी कतरा रहे हैं। घरों की छतों पर सूखने के लिए रखे गए अनाज को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, वहीं छतों पर रखी पानी की टंकियों और पाइपों को भी बंदर तोड़ रहे हैं, जिससे लोगों को पानी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।
●सबसे अधिक परेशानी कस्बे के व्यापारियों को उठानी पड़ रही है। दुकानों के बाहर टांगे गए गए चिप्स, कुरकुरे, नमकीन के पैकेट को बंदर उठा ले जा रहे हैं, जिससे व्यापार चौपट होता जा रहा है। फल विक्रेताओं की स्थिति और भी दयनीय है, बंदर खुलेआम फलों को लेकर भाग जा रहे हैं, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
●बंदर इतने उत्पाती है की वे बिजली के खम्बो पर चढ़ कर इतना तेज झकझोरते है की लोगो के बिजली के केबल शांर्ट होने लगते है। लोगो ने इस समस्या को लेकर कई बार वन विभाग को अवगत कराया। लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। वन विभाग की उदासीनता से लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है। लोगों का आरोप है कि विभाग केवल मूकदर्शक बनकर बैठा हुआ है।कस्बे के लोगो ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द इन उत्पाती बंदरों को पकड़कर सुरक्षित तरीके से जंगलों में छोड़ा जाए, ताकि कस्बे के लोगों को इस समस्या से निजात मिल सके।
