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100 साल पहले कैसा था मुगलसराय? छोटे रेलवे ठिकाने से जंक्शन सिटी बनने तक की कहानी

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मुगलसराय (अशोक कुमार जायसवाल ) (अब पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन)।
156 साल पुराने ऐतिहासिक मुगलसराय जंक्शन का नाम भले ही बदलकर पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन कर दिया गया हो, लेकिन यह स्टेशन आज भी अपने भीतर एक लंबा इतिहास समेटे हुए है। कभी सिर्फ रेलवे प्लेटफॉर्म तक सीमित यह इलाका आज बड़े जंक्शन और आबादी वाले शहर के रूप में विकसित हो चुका है।
स्थानीय इतिहास जानने वाले कमरान अहमद बताते हैं कि करीब 100 साल पहले का मुगलसराय आज जैसा बिल्कुल नहीं था। उस समय यह एक छोटा-सा क्षेत्र था, जहां मुख्य रूप से रेलवे प्लेटफॉर्म और उसके आसपास का सीमित इलाका ही बसता था। न चौड़ी सड़कें थीं, न ही आधुनिक इमारतें। पूरे शहर की पहचान केवल रेलवे तक सीमित थी।


उनके अनुसार, जहां आज प्लेटफॉर्म के पास मंदिर बना हुआ है, उसके पीछे का इलाका पहले पहाड़ी टीलों जैसा दिखाई देता था। पास में एक छोटा-सा सरकारी बस स्टैंड हुआ करता था, लेकिन उसके आगे-पीछे कोई खास बसावट नहीं थी। पुल के नीचे का जो क्षेत्र आज व्यस्त और आबाद दिखता है, वह उस दौर में लगभग खाली पड़ा रहता था।


मुगलसराय की आबादी बढ़ने की मुख्य वजह रेलवे ही रही। दूर-दराज के इलाकों से मजदूर काम की तलाश में यहां आते, कुछ समय रुकते और फिर आगे बढ़ जाते थे। यह जंक्शन रेलवे के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण रहा है, क्योंकि यहां लगभग सभी ट्रेनें रुकती हैं। यहां इंजन बदले जाते थे और कारखानों की वजह से भी रोजगार मिलता था।
मुगलसराय से चार प्रमुख रेल मार्ग निकलते हैं—एक गया की ओर, दूसरा दानापुर की तरफ, तीसरा बनारस की दिशा में और चौथा मिर्जापुर व इलाहाबाद होते हुए दिल्ली की ओर जाता है। इसी वजह से यह जंक्शन लंबे समय से रेलवे का अहम केंद्र बना रहा।
समय के साथ मुगलसराय में आबादी बढ़ी, लेकिन शहर की बड़ी आबादी अब भी रेलवे पर निर्भर रही। यहां बनी अधिकांश रेलवे कॉलोनियां आजादी से पहले की हैं, जो अब जर्जर हालत में पहुंच चुकी हैं। बदलते दौर में कई लोग यहां से अन्य स्थानों पर बस गए और पुराने घर खाली होते चले गए।
आज भले ही मुगलसराय का नाम बदल गया हो और शहर का स्वरूप भी काफी बदल चुका हो, लेकिन इसका इतिहास अब भी रेलवे और उससे जुड़े लोगों की यादों में जिंदा है। कभी छोटा-सा रेलवे ठिकाना रहा यह इलाका अब एक बड़े जंक्शन शहर के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए है।

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