

चंदौली । धानापुर विकासखंड के गुरैनी गांव में चल रही चकबंदी प्रक्रिया को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। मंगलवार को बड़ी संख्या में ग्रामीणों और किसानों ने चकबंदी विभाग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए अनियमितता, पक्षपात और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। प्रदर्शनकारियों ने विभागीय अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और निष्पक्ष जांच की मांग की।
ग्रामीणों का आरोप है कि धारा-52 के तहत की जा रही चकबंदी कार्रवाई में पारदर्शिता का अभाव है। उनका कहना है कि सड़क और गंगा किनारे स्थित मूल्यवान भूमि के आवंटन में नियमों की अनदेखी कर प्रभावशाली लोगों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। किसानों का आरोप है कि धनबल के प्रभाव में कुछ लोगों के पक्ष में चक काटे गए हैं, जिससे छोटे और सीमांत किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
ग्रामीण खरपत राम ने बताया कि गुरैनी गांव की आबादी लगभग तीन हजार है, जबकि यहां करीब एक हजार मतदाता हैं। गांव के अधिकांश किसान लघु एवं सीमांत श्रेणी के हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावशाली लोग धन के बल पर अपनी भूमि को बेहतर स्थानों पर स्थानांतरित करा रहे हैं, जबकि गरीब किसानों की उपजाऊ और मूल्यवान जमीन उनसे दूर कर दी जा रही है।
प्रदर्शन कर रहे किसानों ने कहा कि वे अपनी समस्याओं को लेकर लंबे समय से अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनकी शिकायतों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। इससे निराश होकर अब किसानों ने सकलडीहा उपजिलाधिकारी से धरना-प्रदर्शन की अनुमति लेने का निर्णय लिया है।


ग्रामीणों के अनुसार, सोमवार को गुरैनी पंप कैनाल पहुंचे जिलाधिकारी चंद्रमोहन गर्ग से भी उन्होंने चकबंदी में कथित अनियमितताओं की शिकायत की थी और मौके का निरीक्षण कराने की मांग रखी थी। हालांकि किसानों का आरोप है कि जिलाधिकारी ने व्यस्तता का हवाला देते हुए उनकी बात विस्तार से नहीं सुनी, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी और बढ़ गई है।
ग्रामीण हरिओम मिश्रा ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि चकबंदी में हो रही कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई, तो किसान बड़े स्तर पर आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
प्रदर्शन में वासुदेव निषाद, दशमी निषाद, महेंद्र निषाद, संतोष निषाद, दिलीप, राजेश, संजय, रामअवध, हरिओम मिश्रा, बालकिशन यादव सहित सैकड़ों ग्रामीण और किसान मौजूद रहे। ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर किसानों को न्याय दिलाने की मांग की है।