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चकिया तिराहे की मंडी में दूध का भाव गिरा

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मिलावटखोरी के कारण दूधियों को हो रहा भारी नुकसान

मुगलसराय के दिन सोमवार को चकिया तिराहे पर जिले की सबसे बड़ी दूध मंडी लगती है, जहां न केवल स्थानीय क्षेत्रों से बल्कि बिहार से भी दूधिया दूध लेकर पहुंचते हैं। इन दिनों बाजार में मिलावटी दूध, दही, पनीर, घी, लस्सी और खोया की भरमार के कारण शुद्ध दूध का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

दूधियों को उनके दूध का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। बाजार में बड़े मिष्ठान की दुकानों, होटलों, शादी-समारोहों और त्योहारों में मिलावटी डेयरी उत्पादों की बिक्री सस्ते दामों पर हो रही है। मुगलसराय बाजार में दूध, पनीर, खोया और लस्सी बनाने वाले पाउडर भी खुलेआम बेचे जा रहे हैं।

दूधियों के अनुसार, वे गांवों से लगभग 50 रुपये प्रति लीटर की दर से दूध एकत्र करते हैं। हालांकि, मंडी में भी यही दूध 50 से 60 रुपये प्रति लीटर ही बिक पा रहा है। पहले लग्न, त्योहारों और चैत्र नवरात्र के बाद दूध की कीमत 70 से 80 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच जाती थी, लेकिन इस बार मिलावटखोरी के कारण दरों में कोई वृद्धि नहीं हुई है।

मुस्तफापुर कांटा निवासी दूधिया श्याम अवध यादव

बताते हैं कि वे गांवों में घर-घर जाकर 50 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से दूध खरीदते हैं, लेकिन बाजार में भी उन्हें यही दर मिल रही है। उनका कहना है कि मिलावट के कारण लोग असली दूध पर भी भरोसा नहीं कर पा रहे हैं।

बसनी के किसान केदार यादव ने कहा कि सरकार पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाओं का दावा करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर पशुपालकों को इन योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। कम दरों के कारण उन्हें घाटा उठाना पड़ रहा है।

सिकंदरपुर चकिया के दूधिया राजेश यादव के अनुसार, खुले बाजार में मिलावटखोरी का खेल चल रहा है, जिससे असली दूध का दाम गिर गया है और दूधिया मजबूर हैं।

डेवढ़िल चंदौली के पशुपालक जोगिंदर यादव ने बताया कि महंगाई चरम पर है, लेकिन दूध का रेट नहीं बढ़ रहा। कम दाम मिलने से पशुओं के चारे का खर्च निकालना भी मुश्किल हो रहा है।

मुश्किल हो गया है, जबकि बाजार में मिलावटी सामान सस्ते में उपलब्ध है।”
निष्कर्ष: चकिया तिराहे की दूध मंडी, जो कभी जिले की सबसे बड़ी और प्रमुख मंडी मानी जाती थी, आज मिलावटखोरी के चलते संकट में है। यदि जल्द ही इस पर रोक नहीं लगी, तो न केवल दूधियों का कारोबार खत्म होगा बल्कि उपभोक्ताओं को भी शुद्ध दूध मिलना मुश्किल हो जाएगा।

कैलाश यादव दूधमंडी मलिक


दूध वाले लोग को सही मेहनत का लागत नहीं मिल रहा है जिससे लोगों का कहना है की पाउडर दूध बिकने की वजह से मार्केट में जो दूध ओरिजिनल आ रहा है सही रेट उसका नहीं मिल पा रहा है जिससे काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा है और पाउडर दूध पनीर और खोवा रोग लगाया जाए तो तुझे मंडी में दूध आता है इस्तेमाल करने पर कई बीमारियों को दावत दे सकता है।

जोगिंदर यादव दूधिया द्वारा बताया गया की मार्केट में जो पाउडर दूध और पनीर खोवा बेचने से काफी समस्या का सामना करना पड़ा है ।जिससे हम लोग किसानों से₹50 प्रति लीटर दूध खरीदने हैं वही रेट बाजार में भी बिक रहा है। इससे दूधिया घाटे का सौदा करने को मजबूर है। अगर बाजार में पाउडर के दूध पनीर घी लस्सी आदि पर रोक लगा दिया जाए तो शायद दूधियों के दूध का उचित मूल्य मिले।

केदार यादव किसान


पाउडर का दूध बिकने की वजह से काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा है । अगर सरकार पाउडर पर शक्ति से रोक लगा दे तो दूध का उचित मूल्य मिले और किसानों दुधियों का आर्थिक उत्थान भी हो ।लेकिन पाउडर बनाने वाली मशीन पूंजीपतियों के पास है ।उनसे ज्यादा मुनाफा लेकर इस कारोबार को बढ़ावा सरकार द्वारा दिया जा रहा है।

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