
चकिया(चन्दौली) । टेट परीक्षा की अनिवार्यता के विरोध में क्षेत्र के शिक्षकों ने आंदोलन के दूसरे चरण में सोमवार को अपने-अपने विद्यालयों में बांह पर काली पट्टी बांधकर पठन-पाठन किया। शिक्षकों ने इसे अपने सम्मान और सेवा शर्तों से जुड़ा मुद्दा बताते हुए शासन के निर्णय पर आपत्ति जताई।
प्राथमिक शिक्षक, जो इस समय यूपी बोर्ड परीक्षा की ड्यूटी में तैनात हैं, उन्होंने भी कार्यस्थल पर काली पट्टी बांधकर ड्यूटी निभाई। वहीं ब्लॉक संसाधन केंद्र (बीआरसी) चकिया पर आयोजित प्रशिक्षण एवं बैठक में भी शिक्षकों ने काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया।
ज्ञात हो कि सर्वोच्च न्यायालय के 1 सितंबर 2025 के निर्णय के अनुसार वर्ष 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को दो वर्ष के भीतर टेट परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। साथ ही पदोन्नति के लिए भी टेट उत्तीर्ण होना आवश्यक कर दिया गया है। इसे लेकर शिक्षकों में व्यापक असंतोष व्याप्त है।

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने कहा कि शिक्षक नियुक्ति के समय निर्धारित सभी योग्यताएं पूरी कर चुके हैं, ऐसे में वर्षों बाद पुनः परीक्षा देना अन्यायपूर्ण है। उन्होंने कहा कि अन्य सेवाओं में कार्यरत अधिकारियों से दोबारा प्रवेश परीक्षा नहीं ली जाती, तो शिक्षकों के साथ अलग व्यवहार क्यों किया जा रहा है।
चकिया शिक्षक संघ अध्यक्ष अजय गुप्ता ने बताया कि इस निर्णय से शिक्षक समुदाय स्तब्ध है। उन्होंने शासन से एनसीटीई में संशोधन कर अध्यादेश के माध्यम से शिक्षकों को टेट परीक्षा से मुक्त रखने की मांग की।
टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के आह्वान पर आंदोलन की आगामी रूपरेखा भी घोषित की गई है। 22 फरवरी को दोपहर 2 से 4 बजे तक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर #JusticeForTeachers अभियान चलाया गया, जो लगातार चार घंटे तक ट्रेंड करता रहा। 23 से 25 फरवरी तक शिक्षक अपने-अपने कार्यस्थलों पर काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराएंगे। वहीं 26 फरवरी 2026 को दोपहर 1 बजे से जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद शिक्षक बीएसए कार्यालय से पैदल मार्च करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचेंगे और प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपेंगे।
काली पट्टी बांधकर विरोध जताने वालों में अजय गुप्ता, बाबूलाल, राजेश पटेल, अनिल प्रताप यादव, अशोक प्रजापति, प्रदीप जैसल, श्याम बिहारी सिंह, जितेंद्र तिवारी, वीरेंद्र नाथ दत्त, विनय पटेल, अनिल पटेल, अनुपमा सिंह, अनीता रानी, नूतन पटेल, छत्रधारी सिंह, दूरदेशीराम, कन्हैया खरवार, विनोद त्रिपाठी, संदीप चौधरी, विनय सिंह, अतुल पांडे, अतुल जायसवाल सहित बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल रहे।