
चंदौली। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के पदाधिकारियों ने गुरुवार को अमेरिका-भारत व्यापार समझौते के विरोध में कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन किया। इस दौरान किसान नेताओं ने जिलाधिकारी चंद्रमोहन गर्ग से मुलाकात कर राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा और समझौते को रद्द करने की मांग उठाई।
प्रदर्शनकारियों ने समझौते की प्रतीकात्मक प्रतियां जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया। किसान नेताओं का आरोप है कि प्रस्तावित व्यापार समझौते से भारतीय कृषि व्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा और छोटे-मझोले किसानों की आजीविका संकट में आ सकती है।
किसानों की सहमति के बिना समझौता: जिलाध्यक्ष

भाकियू (टिकैत) के जिलाध्यक्ष दयाशंकर सिंह उर्फ गोपाल ने कहा कि यह समझौता किसान विरोधी है और इसे लागू करने से पहले किसानों की राय नहीं ली गई। उन्होंने कहा कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है, लेकिन इस समझौते में किसानों के हितों की अनदेखी की जा रही है।
उन्होंने आशंका जताई कि यदि सोयाबीन, मक्का, गेहूं, दालों और डेयरी उत्पादों पर आयात शुल्क कम किया गया तो भारी सब्सिडी और मशीनीकरण से तैयार सस्ती विदेशी उपज भारतीय बाजार में आएगी। इससे स्थानीय किसान प्रतिस्पर्धा में टिक नहीं पाएंगे और कृषि क्षेत्र पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।
डेयरी व ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर की चिंता
किसान नेताओं ने कहा कि भारत का डेयरी मॉडल छोटे और सीमांत किसानों तथा सहकारी व्यवस्था पर आधारित है। ऐसे में अमेरिकी डेयरी उत्पादों के बाजार में आने से लाखों दुग्ध उत्पादक परिवार प्रभावित हो सकते हैं, जिसका सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

साथ ही आरोप लगाया गया कि व्यापार संतुलन के नाम पर भारत पर कृषि सब्सिडी घटाने और सार्वजनिक खरीद प्रणाली को कमजोर करने का दबाव बनाया जा सकता है। इससे एमएसपी व्यवस्था, सार्वजनिक वितरण प्रणाली और खाद्य आत्मनिर्भरता पर भी असर पड़ने की आशंका जताई गई।
समझौता रद्द करने की मांग
भाकियू पदाधिकारियों ने केंद्र सरकार से अमेरिका-भारत व्यापार समझौते को तत्काल रद्द करने की मांग की। प्रदर्शन में जितेंद्र प्रताप तिवारी, अच्छे लाल यादव, सतीष पांडेय, विभूति नारायण तिवारी, मनोज यादव, रामअवध यादव, सुरेंद्र यादव, रामभजन मौर्य, कलीमुद्दीन समेत कई किसान नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।